
पाकिस्तान में नहीं दिखती बदलाव की सूरत
उसने बताया, “तमाम पार्टियों ने 12 साल की एक बच्ची अंजलि के धर्मांतरण का जमकर विरोध किया और निंदा भी की, लेकिन जब बिलावल भुट्टो ने इस घटना पर स्वत: संज्ञान लिया, पीपीपी के नेताओं ने चुप्पी साध ली, क्योंकि वो जानते हैं कि कुछ भी नहीं बदला जा सकता। ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ हिंदुओं के साथ है ईसाई, शिया और अहमदी लोग भी अक्सर निशाना बनते रहते हैं। हालात नाजुक हैं। ऐसी जगह पर जहां खुर्शीद शाह नामक व्यक्ति को सिर्फ मुजाहित शब्द के इस्तेमाल भर से धार्मिक उल्लंघन का आरोप मढ़ दिया गया, एक सड़क का नाम भगत सिंह के नाम पर रखने वाले एक सच्चे पाकिस्तानी को मुश्किलों का सामना करना पड़ा, जबकि मुमताज कादरी जैसे अपराधियों का पूल लेकर स्वागत किया जाता है, लोगों को उनके भरोसो को भूलने को मजबूर किया जाता है।”
पीड़ित के दोस्त अजीत ने बताया कि वो कुछ ही दिनों में अपनी मातृभूमि को छोड़ देगा। पीड़ित ने बताया कि उन्होंने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं कि वो चाहते हैं हम अपने विश्वास को भूलकर अपनी मातृभूमि को छोड़ दें। वो पूछता है कि अब आप ही बताएं ऐसे हालात में हमें क्या करना चाहिए?