
इस्लाम में गाय का महत्व
- गाय चौपायों की सरदार है" – कुरान
- गाय का दूध-घी शिफा (दवा) है और गौमांस बीमारी है" - मोहम्मद साहब
- खुदा के पास खून और गोश्त नहीं पहुँचता - त्याग की भावना पहुँचती है"
- बाबर से बहादुर शाह जफ़र तक के शासन काल में गोहत्या प्रतिबंधित थी
- बहादुर शाह जफर ने स्वयं मुनादी फिरवाई थी कि बकरीद पर गाय की कुर्बानी करने वाले को तोप से उड़ा दिया जायेगा
- गो हत्या करने वाले के विरुद्ध, क़यामत के दिन, मोहम्मद साहब गवाही देंगे - देव बंद के फतवे का सार
- मुग़ल बादशाह बाबर, हुमायूं, अकबर, जहाँगीर एवं अहमद शाह ने भी गोहत्या पर प्रतिबन्ध लगाया था
- बिला सक तुम्हारे लिए चौपायों मे भी सीख है| पेट मे से गोबर और खून के बीच मे से साफ़ दूध जो पीने वालों के लिए स्वाद वाला है - कुरान सरीफ़ १६-६६
- मुसलमानों को गाय को नहीं मारना चाहिए ऐसा करना हदीस के खिलाफ़ है - मौलाना हयात साहब खानखाना हाली समद साहब
- काहिर व बरकत” से पता चलता है की सरीफ़ मक्का ने भी गौ हत्या पर पाबन्दी लगवायी थी - मौलाना फारुखी