नई दिल्ली: दो साल पहले दाउद इब्राहिम की वापसी पर यूपीए सरकार में चर्चा हुई थी। एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित खबर के अनुसार दो साल पहले दिल्ली के एक वकील और कांग्रेस नेता ने अपनी पार्टी के आला नेताओं तक खबर पहुंचाई थी कि दाउद इब्राहिम लौटने को तैयार है।
इस प्रस्ताव पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन के बीच विचार-विमर्श किया गया था।
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इस बात की पुष्टि करते हुए पूर्व यूपीए सरकार में वरिष्ठ पदों पर पदस्थ रहे अधिकारियों ने कहा है कि इस मुद्दे पर संगठन स्तर और सरकार के स्तर पर भी चर्चा हुई थी। दो दशक बाद पहली बार दाऊद ने 1993 के विस्फोट कांड में ट्रायल का सामना करने की अपनी इच्छा दर्शाई थी।
अखबार के अनुसार तत्कालीन अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि इस प्रस्ताव के बारे में पहले कांग्रेस नेतृत्व को बताया गया और बाद में इस मुद्दे को प्रधानमंत्री कार्यालय में चर्चा के लिए लाया गया।
सूत्रों के अनुसार इस प्रस्ताव से यह भी खुलासा हुआ है कि दाऊद किडनी की बीमारी से जूझ रहा है और वह अपने परिवार के साथ रहना चाहता है।
पर उस वकील और कांग्रेस नेता को बताया गया कि ऐसा करना बहुत जल्दबाजी होगी और भारत में दाऊद की शर्तों और उस पर मुकदामा चलाना बेहद जोखिभ भरा होगा। बाद मे दाऊद के लौटने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।