1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. नासिक कुम्भ के दौरान जरुर करें त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन

नासिक कुम्भ के दौरान जरुर करें त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jul 13, 2015 04:04 pm IST,  Updated : Jul 14, 2015 01:59 pm IST

नई दिल्ली: यदि आप नासिक कुम्भ जा रहे है तो भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाने वाले त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन जरुर करें। यह नासिक से 38 किलोमीटर दूर स्थित है। गोदावरी

नासिक कुम्भ के दौरान...- India TV Hindi
नासिक कुम्भ के दौरान जरुर करें त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन

नई दिल्ली: यदि आप नासिक कुम्भ जा रहे है तो भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे प्रमुख माना जाने वाले त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग का दर्शन जरुर करें। यह नासिक से 38 किलोमीटर दूर स्थित है।

गोदावरी नदी के उद्गम स्थल और ब्रह्मगिरी की खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में बने इस मंदिर में त्रिदेव के दर्शन होते हैं।

यह मंदिर 270 वर्गफुट में फैला हुआ है। यहाँ स्वयंभू रूप में अंगूठे के आकार जितने बड़े तीन लिंग हैं, जिन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का रूप माना गया है।

त्रयंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की प्रतिष्ठापना के बारे में उल्लेख है कि कभी यहाँ तपोवन में गौतम ऋषि निवास करते थे।

एक बार उनके आश्रम में ऋषियों के छल से उन पर गो-हत्या का अपराध लग गया, जिसके प्रायश्चित के लिए उन्होंने ब्रह्मगिरी पर्वत पर भगवान शंकर का घोर तप किया। भगवान शंकर ने प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिये और वह पाप मुक्त हुए।

गौतम मुनि की प्रार्थना पर भगवान शंकर ब्रह्मगिरी की तलहटी में त्रयंबकेश्वर के रूप में प्रतिष्ठित हो गये। कहते हैं कि गौतम ऋषि ही ब्रह्मगिरी पर गंगा को लेकर आये थे, जो गौतमी या गोदावरी के नाम से जानी जाती है।

इस स्थान पर किया श्राद्ध और पिण्डदान सीधा पितरों तक पहुँचता है। इससे पितरों को प्रेत योनी से मुक्ति मिलती है और वह उत्तम लोक में स्थान प्राप्त करते हैं। ऐसी मान्यता है कि यहाँ श्राद्ध, तर्पण, पिण्डदान एवं पितरों की संतुष्टि हेतु ब्राह्मण भोजन करवाने से पितर तृप्त होकर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।

यहाँ गौतम ऋषि की गुफ़ा है, जिसमें 108 शिवलिंग बने हुए हैं। वहीं आगे जाकर नाथ संप्रदाय के सबसे पहले नाथ गोरखनाथ का भी मंदिर है।

राम-लक्ष्मण तीर्थ भी यहीं हैं, जहाँ अपने वनवास के दौरान कुछ दिन रुक कर भगवान श्रीराम ने अपने पिता दशरथ का श्राद्ध किया था। यहाँ राम का काफ़ी विशाल मंदिर भी बना हुआ है। यहीं 'गंगासागर' नाम का बड़ा-सा कुंड भी बना हुआ है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत