ग्वालियर: एक तरफ दुनिया भर में सरकारें और सामाजिक संस्थान लोगो को नेत्रदान करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं लेकिन ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज में दान की गयी आँखों को कचरे के ढेर में फैंक दिया गया। ग्वालिय के एक परिवार ने बड़े उम्मीदों से अपनी मां की आंखों को दान किया था लेकिन सरकारी अस्पताल जेएएच ने उनकी मां की आंखों को कचरे के ढेर में फैंक दिया।
ग्वालियर निवासी किशन गंभीर ने अपनी मां के निधन के बाद उनकी आंखों का दान किया था, मगर गुरुवार को आंखें कचरे में होने का खुलासा होने से वे बेहद दुखी हैं।
आनन-फानन में मेडीकल कॉलेज के डीन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। वहीं इस घटना को संभागायुक्त के. के. खरे ने गंभीरता से लेते हुए नेत्र विभाग के अध्यक्ष डा. तिवारी, प्रोफेसर डी. के. शाक्य और एक अन्य कर्मचारी नीति को निलंबित कर दिया है।
किशन का कहना है कि जेएएच के इस रवैये से वह बेहद आहत हैं और अपनी मां का दोबारा श्राद्ध करने जा रहे हैं। उन्होंने तो अपनी मां की आंखें इसलिए दान की थी ताकि दूसरे का जीवन रोशन हो और मां की यादें जिंदा रहे मगर ऐसा हो न सका।
दान की आंखें अस्पताल के कचरे में मिलने का खुालासा होने के बाद गुरुवार को उन परिवारों के लोगों का तांता लगा रहा जिन्होंने अपने प्रियजन की मरणोपरांत आंखें दान की है। कई तो ऐसे लोग थे जिन्होंने दान की गई आंखें तक वापस मांग डाली।