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महाराष्ट्र में नए नियमों से बढ़ीं मुख्यमंत्री की शक्तियां, अब मंत्रियों के फैसले बदल सकेंगे CM देवेंद्र फडणवीस

 Reported By: Sachin Chaudhary Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Aug 19, 2026 01:06 pm IST,  Updated : Aug 19, 2026 01:11 pm IST

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जरूरत पड़ने पर मंत्रियों द्वारा लिए गए फैसलों में बदलाव या उन्हें रद्द कर सकेंगे। इससे अब सरकार के अहम फैसलों पर सीएम का नियंत्रण और मजबूत हो जाएगा।

महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस- India TV Hindi
महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस Image Source : PTI

महाराष्ट्र सरकार ने ‘महाराष्ट्र शासन कार्यपद्धति नियम, 2026’ को अधिसूचित कर दिया है। नए नियमों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के फैसलों की समीक्षा करने, उनमें बदलाव करने या उन्हें रद्द करने का स्पष्ट अधिकार दिया गया है। मुख्यमंत्री अगर यह मानते हैं कि किसी मंत्री का फैसला व्यापक सार्वजनिक हित में उचित नहीं है, तो वे उस फैसले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा करते समय मुख्यमंत्री को फैसले में बदलाव या उसे रद्द करने के कारण लिखित रूप में दर्ज करना होगा।

जानिए क्या हैं नए नियम

नए नियमों के मुताबिक, मंत्री अपने-अपने विभागों के रोजमर्रा के कामकाज और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालते रहेंगे। लेकिन मुख्यमंत्री को किसी भी विभाग की फाइल, दस्तावेज या संबंधित रिकॉर्ड सीधे मंगाने का अधिकार होगा। मुख्यमंत्री द्वारा मांगे गए दस्तावेज संबंधित मंत्री और विभाग के सचिव को बिना देरी उपलब्ध कराने होंगे।

पहले क्या था?

नए नियमों से पहले कार्यपद्धति नियमों में मुख्यमंत्री के पास किसी विभाग के प्रभारी मंत्री के फैसले को अपनी ओर से सीधे बदलने, उसकी समीक्षा करने या उसे रद्द करने का स्पष्ट स्वतंत्र अधिकार नहीं था। 2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले में भी इस स्थिति का उल्लेख किया गया था। पुरानी व्यवस्था में विभागीय मंत्री को अपने विभाग से जुड़े फैसलों में व्यापक स्वायत्तता हासिल थी। किसी फैसले को कैबिनेट के समक्ष लाने की स्थिति में ही सामूहिक स्तर पर उस पर पुनर्विचार होता था।

अब 2026 के नए नियमों ने मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों के अधिकारों की सीमा को अधिक स्पष्ट कर दिया है। इसके तहत सार्वजनिक हित में मुख्यमंत्री को किसी भी विभाग के मंत्री के फैसले की समीक्षा कर उसमें बदलाव या उसे रद्द करने की शक्ति मिलेगी।

मुख्य सचिव और सचिवों की भूमिका भी तय

नए नियमों में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों, मुख्य सचिव और विभागीय सचिवों की प्रशासनिक जिम्मेदारियां और अधिकार भी स्पष्ट किए गए हैं। किसी नियम की व्याख्या को लेकर संदेह होने पर मामला मुख्यमंत्री के पास भेजा जा सकेगा। मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रधान सचिव को मुख्यमंत्री की अनुमति से किसी समिति की अध्यक्षता करने का अधिकार भी दिया गया है।

वित्तीय फैसलों पर भी सख्ती

नए नियमों में वित्तीय मामलों को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान हैं। वित्त विभाग की पूर्व मंजूरी के बिना ऐसा कोई फैसला नहीं लिया जा सकेगा जिससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़े। जमीन, खनिज या सरकारी संपत्ति से जुड़ी रियायत, लीज या पट्टे के मामलों में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।

नए कानून बनाने, मौजूदा कानून में संशोधन करने या नए नियम तैयार करने से पहले प्रस्ताव को कानून एवं न्याय विभाग के पास जांच के लिए भेजना होगा। केंद्र या किसी अन्य राज्य सरकार के साथ विवाद की आशंका वाले फैसलों की जानकारी मुख्यमंत्री और राज्यपाल को भी दी जाएगी।

महायुति में बढ़ सकता है राजनीतिक तनाव

नए नियमों से मुख्यमंत्री की प्रशासनिक शक्ति और निर्णय प्रक्रिया पर पकड़ मजबूत होने की संभावना है। इससे सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज हो सकती है और विभागों के बीच नीतिगत मतभेदों को दूर करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, राजनीतिक तौर पर इसका असर महायुति गठबंधन के भीतर भी दिखाई दे सकता है। सहयोगी दलों के मंत्रियों को लग सकता है कि उनके विभागीय फैसलों पर मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उनकी स्वायत्तता और राजनीतिक प्रभाव कम हो रहा है। ऐसे में बड़े नीतिगत फैसलों और सरकारी खर्च से जुड़े मामलों को लेकर गठबंधन के भीतर खींचतान की स्थिति भी पैदा हो सकती है।

महाराष्ट्र शासन कार्यपद्धति नियम, 2026

कुल मिलाकर, ‘महाराष्ट्र शासन कार्यपद्धति नियम, 2026’ के जरिए मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच अधिकारों की रेखा पहले से अधिक स्पष्ट की गई है और सार्वजनिक हित के नाम पर मुख्यमंत्री को मंत्रियों के फैसलों में हस्तक्षेप की औपचारिक शक्ति प्रदान की गई है।

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