नई दिल्ली: मतों की गोपनीयता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने बिहार की चुनावी मशीनरी को कई निर्देश देते हुए कहा है कि मतदान केंद्रों पर मतदाता कक्ष बनाने के लिए झीनी सामग्री का इस्तेमाल न किया जाए क्योंकि इससे वोटों की गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए पत्र में निर्वाचन आयोग ने विगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा है कि विशिष्ट दिशा निर्देशों के बावजूद कुछ मतदान कक्ष बनाने के लिए गत्ते का इस्तेमाल किया गया जिनकी ऊंचाई पर्याप्त नहीं थी, जबकि अन्य में घटिया गुणवत्ता वाले और पारदर्शी कपड़े का इस्तेमाल किया गया।
निर्वाचन आयोग ने हाल में कहा, कुछ उदाहरणों में, मतदान कक्ष बनाने के लिए धोती, लुंगी, साड़ी, जूट की बोरी जैसी झीनी सामग्री का इस्तेमाल किया गया। इस तरह के मामलों में मतदान की गोपनीयता प्रभावित हुई होगी। आयोग ने कहा कि कक्ष अपारदर्शी गत्ते से बनाया जाना चाहिए जिसके तीन तरफ चुनाव आयोग का प्रतीक अंकित होना चाहिए। आयोग ने कहा कि कक्ष न तो दरवाजे के पास हो और न ही किसी खिड़की के पास हो क्योंकि इससे मताधिकार की गोपनीयता पर असर पड़ सकता है। इसने कहा कि कक्ष में जिस मेज पर मतदान इकाई स्थापित की जानी हो, वह ढाई फुट लंबी होनी चाहिए जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि मतदाताओं को मतदान करने में कोई दिक्कत न हो।
चुनाव आयोग ने कहा कि मतदान इकाई (ईवीएम) और नियंत्रण इकाई को जोड़ने वाली केबल हमेशा दिखती रहनी चाहिए और किसी भी सूरत में कपड़े या किसी अन्य सामग्री से नहीं ढका जाना चाहिए, ताकि अगर यह हट जाए तो सबको दिखाई दे सके।
मतदाता मशीन से छेड़छाड़ नहीं कर पाए या केबल को नहीं हटा पाए, यह सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों से कार्डबोर्ड या फ्लेक्सीबोर्ड में इतना बड़ा छेद करने के लिए कहा गया है जिससे कि केबल पर नजर रखी जा सके । लेकिन छेद इतना बड़ा नहीं होना चाहिए कि इससे मतदाता की निजता प्रभावित हो। बिहार विधानसभा चुनाव पांच चरणों में 12, 16, 28 अक्टूबर और एक नवंबर तथा पांच नवंबर को होगा। मतगणना आठ नवंबर को होगी।