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अब बुजुर्गों को मिलेगा लिव-इन-पार्टनर चुनने का ऑप्शन

 Written By: India TV News Desk
 Published : Nov 16, 2015 05:49 pm IST,  Updated : Nov 16, 2015 05:49 pm IST

नई दिल्ली: आमतौर पर देखा जाता है कि लड़के-लड़कियां लिवइन रिलेशनशिप में रहते है लेकिन अहमदाबाद का एक एनजीओ बुजुर्गों के लिए यह सुविधा प्रदान कर रहा है। बुढ़ापे में सहारा और साथ चाहने वालों

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अब बुजुर्गों को मिलेगा लिव-इन-पार्टनर चुनने का ऑप्शन

नई दिल्ली: आमतौर पर देखा जाता है कि लड़के-लड़कियां लिवइन रिलेशनशिप में रहते है लेकिन अहमदाबाद का एक एनजीओ बुजुर्गों के लिए यह सुविधा प्रदान कर रहा है। बुढ़ापे में सहारा और साथ चाहने वालों के लिए यह खुशखबरी है। यह एनजीओ ‘सीनियर सिटीजन लिव-इन-रिलेशनशिप सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है, जिसमें करीब 300 पुरुष और पचास महिलाओं ने अब तक रजिस्ट्रेशन कराया है।

युवा वर्ग में लिव-इन रिलेशनशिप काफी तेजी से चलन में आ रहा है लेकिन रूढ़िवादी सामाजिक-पारिवारिक खांचे में कई बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं और उन्हें अपना बुढ़ापा अकेले ही गुजारना पड़ता है।

इस उम्र में साथी की कितनी जरूरत होती है और वो हमारे लिए कितना मायने रखता है इसे समझते हुए विना मूल्य अमूल्य सेवा (VMAS) नामक एनजीओ ने बुजुर्गो के लिए यह सेवा शुरू की है। 22 नवंबर को अहमदाबाद में वीएमएएस ‘सीनियर सिटीजन रिलेशनशिप सम्मेलन’ आयोजित कर रहा है। इसके लिए 50 से लेकर 85 साल की उम्र के करीब 300 से ज्यादा पुरुषों और 50 से ज्यादा महिलाओं ने रजिस्ट्रेशन किया है।

साल 2011 में भी हुआ था ऐसा कार्यक्रम

अहमदाबाद में यह कार्यक्रम पहली बार नहीं हो रहा है। इससे पहले भी साल 2011 में इसी तरह के सम्मेलन में बुजुर्गों के 7 जोड़ों ने एक-दूसरे को लिव-इन रिलेशनशिप के लिए पसंद किया था।

वीएमएस के संस्थापक नातू पटेल ने कहा कि ज्यादा उम्र के लोगों के साथ मेल-जोल में परेशानी होने के साथ ही उनका परिवार भी अहम मुद्दा होता है। उन्होंने बताया कि कुछ महीने लिव-इन-रिलेशनशिप में रहकर ये लोग तय करते है कि आगे उन्हें शादी के बंधन में बंधना है या नहीं।

पटेल ने बताया कि सामाजिक स्थिति और पारिवारिक दबाव के चलते बहुत कम महिलाएं इस कार्यक्रम में हिस्सा ले रही हैं। महिलाओं की ज्यादा से ज्यादा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए उनकी यात्रा में आने वाला खर्च भी उठाया जा रहा है।

कार्यक्रम के आयोजक ने बताया कि सम्मेलन में मिलने और साथ रहने का फैसला करने वाले जोड़ों पर आगे भी ध्यान दिया जाता है। नियमित तौर पर उनसे संपर्क बनाकर रखा जाता हैं ताकि लिव-इन में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं का उत्पीड़न ना हो।

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