नई दिल्ली: ऐसे अनेक किस्से मशहूर हैं कि प्राचीन काल में दुनिया के कई देशों में धार्मिक और अन्य कारणों से इनसान की बलि दी जाती थी। भारत भी ऐसे किस्सों से अनछुआ नहीं है। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां किसी ज़माने में इनसानों की बलि दी जाती थी। आपको यह जानकर जरूर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है। बताया जाता है कि भारत के शहर उज्जैन में प्राचीन समय में हर दिन इनसानों की बलि दी जाती थी। इस मंदिर का नाम भूखी माता का मंदिर है। इस मंदिर की कहानी सम्राट विक्रमादित्य के राजा बनने से जुड़ी है।
इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि यहां पर प्रतिदिन एक व्यक्ति की बलि चढ़ाई जाती थी। जिस भी लड़के को अवंतिका नगरी का राजा बनाया जाता था, भूखी माता उसे खा जाती थी। एक बार एक दुखी मां को विलाप करते देख विक्रमादित्य ने उसके पुत्र की रक्षा का वचन दिया। विक्रमादित्य ने कहा कि उसके बेटे की जगह वे स्वयं भूखी माता का भोग बन जाएंगे। राजा बनते ही विक्रमादित्य ने पूरे शहर को स्वादिष्ट व खुशबू वाले व्यंजनों से सजाने का आदेश दिया। जगह-जगह छप्पन भोग सजाए गए। भूखी माता की भूख विक्रमादित्य को अपना आहार बनाने से पहले ही खत्म हो गई। साथ ही उन्होंने विक्रमादित्य को प्रजा पालक चक्रवर्ती सम्राट होने का आशीर्वाद दिया। इस प्रकार मानव बलि की यह प्रथा समाप्त हुई।
दुनिया के कई देशों में प्राचीन काल में इनसान की बलि देने का चलन था। कहीं पर आदमियों की बलि दी जाती, तो कहीं पर महिलाओं की। कई समुदायों में तो बलि देने का तरीका इतना क्रूर था कि आप उसकी कल्पना भी नहीं कर सकते। मसलन जिन्दा इंसान का दिल निकालकर सूर्य देवता को अर्पित करना, देवताओं को ज़िंदा बच्चों और महिलाओं की चमड़ी उतारकर अर्पित करना।
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