नई दिल्ली: ग्वालियर के गजराराजा मेडीकल कॉलेज के 5 छात्रों ने राष्ट्रपति प्रवण मुखर्जी को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। ये वही छात्र हैं, जिन्हे कॉलेज प्रशासन ने व्यापम घोटाले में संदिग्ध मानते हुए इनके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इन छात्रो ने ग्वालियर हाईकोर्ट जाकर अपने खिलाफ हुई FIR पर स्टे ले लिया। इन छात्रो की फिंगर प्रिंट रिपोर्ट में भी इनके फर्जी छात्र होने की पुष्टि नहीं हुई थी। फिर भी इन छात्रों को कॉलेज में भेदभाव का शिकार होना पड़ा। जिससे त्रस्त होकर इन छात्रों ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है।
2010 में 956 छात्रों को फर्जी बताया था-
PMT फर्जीवाड़े में GRMC मेडीकल कॉलेज की डॉ. एससी अग्रवाल जांच टीम ने 2010 के 95 छात्रों को फोटो और हस्ताक्षर मिसमैच होने पर संदिग्ध छात्रा बताया था। साथ ही उनके खिलाफ ग्वालियर के झांसीरोड़ थाने में भी शिकायत दर्ज कराई थी। इस दौरान कुछ छात्रों की फिंगर रिपोर्ट में उनके फर्जी होने की पुष्टि नहीं हुई और वह हाईकोर्ट की शरण में पहुंच गए। जहां से उन्हे रिलीफ दिया गया और साथ ही MBBS की डिग्री कॉलेज से पूरी करने की अनुमति भी दी गयी थी ।
2013 से ग्वालियर SIT इन छात्रों के फर्जी होने के प्रमाण अभी तक कोर्ट में पेश नहीं कर सकी है। लेकिन इन छात्रों को इस दौरान भारी परेशानी का समाना करना पड़ रहा है, संदिग्ध छात्रों के मुताबिक उन्हे समाज में नीचा देखने को मिल रहा है। साथ ही GRMC कॉलेज प्रबंधन के द्वारा भेदभाव किया जा रहा है, जिससे वो हर रोज प्रताड़ित हो रहे है। जिसके चलते अब संदिग्ध छात्र मनीष शर्मा, अमित चढ़्ढा, विकास गुप्ता, राधवेंद्र भदौरिया ओर पकंज बंसल ने राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की गुहार लगाई है। वही GRMC मेडीकल कॉलेज इन सब बातों से अंजान है, उसका कहना है कि सभी छात्र उनके लिए सामान है किसी भी छात्र के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
छात्रो को SIT गुनाहगार नहीं साबित कर सकी-
बहरहाल सवाल इस बात का है कि अखिर 2 साल तक ग्वालियर SIT की जांच इतनी धीमी गति से क्यों चल रही थी। जिसमें न तो संदिग्ध छात्रों को SIT गुनाहगार सबित कर सकी, और न ही बेगुनाह, इन सब के बीच वह छात्र अपने ऊपर लगे तमगे को हटाने की गुहार राष्ट्रपति से लगा रहे है। जिसमें उन्हे PMT फर्जीवाड़ा का आरोपी बताया गया है, ऐसे में अब देखना होगा इन छात्रों की पीड़ा को राष्ट्रपति कब तक सुन पाते है।