कोलकाता: वाहनों और रेहड़ी-पटरी वाले विक्रेताओं पर गुरुवार को कोलकाता में गिरे एक फ्लाईओवर के मलबे से आज तीन और लोगों के शव बरामद किए गए और मरने वालों की कुल संख्या 24 पहुंच गई। इस फ्लाईओवर का निर्माण करने वाली कंपनी के पांच अधिकारियों को भी हिरासत में लिया गया है। इस घटना में करीब 90 लोग घायल हुए थे जिनमें से सात की हालत काफी गंभीर बनी हुई है।
एक पुलिस अधिकारी ने आज बताया कि सेना के जवान कोलकाता पुलिस, आपदा प्रबंधन दल, राष्ट्रीय आपदा राहत बल और दमकल कर्मियों के साथ मिलकर रातभर बचाव अभियान में जुटे रहे। उन्होंने कंक्रीट के मलबे के नीचे से तीन और शवों को बरामद किया। उन्होंने बताया कि इस दुर्घटना में घायल होने वालों की संख्या तकरीबन 90 है।
उन्होंने कहा, कोई भी व्यक्ति अभी तक जीवित नहीं पाया गया है। चकनाचूर हुए दो ऑटोरिक्शा समेत कई और वाहनों को मलबे से निकाला गया है। अभी भी एक लोडिंग वाहन (लॉरी) मलबे में दबी हुई है। अभी वहां कोई और फंसा है या नहीं इस बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता। निर्माणाधीन इस फ्लाईओवर का लगभग 60 मीटर लंबा हिस्सा कल अपराह्न अचानक गिर गया था और कई लोग इसके नीचे दब गए थे।
कोलकाता के पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने बताया कि इस फ्लाईओवर का निर्माण कर रही हैदराबाद की आईवीआरसीएल कपंनी के पांच अधिकारियों को हिरासत में लिया गया है। कोलकाता पुलिस आयुक्त राजीव कुमार ने कहा, हमने निर्माण कंपनी के कुछ अधिकारियों को हिरासत में लिया है। हम उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
कोलकाता पुलिस ने कल हैदराबाद की इस कंपनी के खिलाफ भादंसं की धारा 304, 308 और 407 के तहत मामला दर्ज किया था और साथ ही कंपनी के स्थानीय कार्यालय को सील कर दिया था। निर्माण कंपनी आईवीआरसीएन कंस्ट्रक्शन कंपनी से जुड़े पांडुरंग राव ने दावा किया था, यह कुछ नहीं बल्कि भगवान की मर्जी थी।
पश्चिम बंगाल ने इस मामले में एक उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। इसी के साथ ममता बनर्जी की सरकार पर विपक्षी दलों द्वारा आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है।
इसी बीच पश्चिम बंगाल से चार सदस्यीय पुलिस दल हैदराबाद पहुंचा ताकि कंपनी के अधिकारियों से इस संबंध में पूछताछ कर सके।