अहमदाबाद: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने महात्मा गांधी को याद करते हुए आज कहा कि स्वच्छ भारत का तात्पर्य स्वच्छ दिमाग के साथ साथ स्वच्छ वातावरण से है और शांति एवं सद्भाव की शिक्षा ही समाज में विघटनकारी ताकतों को नियंत्रित करने और उन्हें नई दिशा देने की कुंजी है।
राष्ट्रपति ने गुजरात विद्यापीठ के 62वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन चुनौतियों का जिक्र किया जिनका सामना देश का उच्चतर शिक्षा क्षेत्र कर रहा है और उन्होंने शिक्षा को सुगम और किफायती बनाए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, गांधी ने अपने जीवन में और मृत्यु के समय भी साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए संघर्ष किया।
मुखर्जी ने कथित असहिष्णुता पर जारी बहस के बीच इस मामले में अपने विचार फिर से व्यक्त करते हुए कहा, शांति एवं सद्भाव की शिक्षा ही समाज में विघटनकारी ताकतों को नियंत्रित करने और उन्हें नई दिशा देने की कुंजी है।
उन्होंने गुजरात विद्यापीठ के आदर्श वाक्य सा विद्या या विमुक्तये का जिक्र करते हुए कहा कि संस्थान को यह प्रदर्शित करना जारी रखना चाहिए कि युवाओं के मन-मस्तिष्क को शिक्षित करके ही अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए सामाजिक कायाकल्प करना संभव है। मुखर्जी ने कहा, बापू के अनुसार स्वच्छ भारत का अर्थ एक स्वच्छ दिमाग, स्वच्छ शरीर और स्वच्छ वातावरण था।