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गणतंत्र दिवस विशेष: क्यों बहादुरी का दूसरा नाम है गोरखा रेजीमेंट?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Jan 25, 2016 12:59 pm IST,  Updated : Jan 26, 2016 02:54 pm IST

नई दिल्ली: 'अगर कोई कहे कि उसे मरने से डर नहीं लगता है तो या तो वह व्यक्ति झूठ बोल रहा है या फिर वह गोरखा है।' यह बात आर्मी के पहले फील्ड मार्शल सैम

gorkha regiment
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गोरखाओं के सबसे प्रसिद्ध पलटन में से एक 1/11 गोरखा राइफल है जिसे 11  वीर चक्र, 2 महा वीर चक्र, 3 अशोक चक्र और एक परम वीर चक्र मिल चुके हैं। गोरखाओं की दूसरी सबसे प्रसिद्ध बटालियन 4 गोरखा राइफल की तीसरी बटालियन है जिसने सियाचिन में ऑपरेशन मेघदूत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 8वे गोरखा राइफल का भी गौरवशाली अतीत है। इसने भारत को दो फील्ड मार्शल दिये हैं। इस समय भारतीय आर्मी के चीफ दलबीर सिंह सुहाग भी गोरखा रेजीमेंट से ही हैं जो कि यह बताता है कि गोरखा रेजीमेंट की ओर से दी जाने वाली सेवाएं देश की अद्भूत सेवाएं में से एक है। गणतंत्र दिवस के मौके पर हम सभी इन गोरखाओं को इनके साहस और बलिदान के लिए सलामी देते हैं और आशा करते हैं कि यह देश का नाम ऐसे ही रोशन करेंगे।

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