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उत्तराखंड मामला: रावत बोले, वो महाबली हैं और हम सिर झुकाकर काम करने वाले लोग

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 21, 2016 06:41 pm IST,  Updated : Apr 21, 2016 06:44 pm IST

उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के गुरुवार के निर्णय को हरीश रावत ने राज्य की जनभावना की जीत बताते हुए कहा कि उत्तराखंड को न्याय मिल गया है और अब पीछे की कडवी यादों को भुलाकर आगे की तरफ देखने की जरूरत है।

Harish Rawat
- India TV Hindi
Harish Rawat

देहरादून: उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रदेश में राष्ट्रपति शासन हटाए जाने के गुरुवार के निर्णय को हरीश रावत ने राज्य की जनभावना की जीत बताते हुए कहा कि उत्तराखंड को न्याय मिल गया है और अब पीछे की कडवी यादों को भुलाकर आगे की तरफ देखने की जरूरत है। गत 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगाने के केंद्र के निर्णय को मुख्यमंत्री रावत ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।

उच्च न्यायालय का फैसला अपने पक्ष में आने के बाद रावत ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वह इस निर्णय का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा, यह उत्तराखंड की जनभावना की जीत है। उत्तराखंड को न्याय मिला है। हालांकि, रावत ने कहा कि राष्ट्रपति शासन लगने के कारण प्रदेश का बहुत महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो गया क्योंकि हर सरकार को अपने पांचवें और अंतिम वर्ष में बहुत से अहम काम करने होते हैं।

उन्होंने कहा, इससे कोई छोटा नुकसान नहीं हुआ है। रोना केवल यह नहीं है कि मार्च में 700 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाया बल्कि यह भी है कि बजट के माध्यम से प्रदेश के विकास की जो दिशा बनाई गई थी, उसकी शुरूआत ही गड़बड़ा गई। हालांकि, रावत ने कहा कि उत्तराखंड के शरीर पर लगे घावों को उच्च न्यायालय के आदेश से मरहम लग गया है। इस संबंध में, उन्होंने कहा, अब हमें प्रदेश के विकास के लिए पुरानी कटु यादों को भूलकर आगे की तरफ देखना चाहिए। उन्होंने कहा, विशेष तौर पर मैं केंद्र से कहना चाहता हूं कि अब भी वह राज्य के साथ सहयोग करें तो हम इन घावों को भी समय के साथ भूलने का प्रयास करेंगे।

रावत ने कहा कि इस संबंध में वह अपने सहयोगियों से भी यही अपेक्षा करते हैं कि वह इस कडवे अध्याय को भूल जाए और प्रदेश के विकास और जनाकांक्षाओं के रास्ते में रूकावट न डालें और आगे की तरफ चलें। उन्होंने अपनी इस लडाई को आम आदमी को समर्पित करते हुए कहा कि यह लड़ाई उत्तराखंड के आम जनमानस ने लड़ी और इसी के बल पर वह ताकत से खड़े रहे। उन्होंने कहा, हमारी कोई ताकत नहीं थी।

असली ताकत उत्तराखंड का जनमानस था। मैं जनता को उसके स्नेह और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद देता हूं। रावत ने संघर्ष की घड़ी में साथ देने के लिए एकजुट रहे कांग्रेस विधायकों के अलावा प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा पीडीएफ के हों सदस्यों का भी धन्यवाद किया और कहा कि वे प्रदेश के हित में लोकतांत्रिक, धर्मनिरपेक्ष और विकासवादी ताकतों के अगुवा बनकर चटटान की तरह उनके साथ खड़े रहे।

रावत ने पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इस समय जश्न न मनाने की सलाह देते हुए कहा कि अब कर्तव्यपालन का समय है जिससे प्रदेश को हुए नुकसान की कुछ भरपाई की जा सके। भाजपा द्वारा उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में जाने की खबरों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, वे महाबली हैं। वे शक्तिशाली हैं। वे चौड़े सीने वाले लोग हैं और हम सिर झुकाकर काम करने वाले लोग हैं। हम कभी लड़ने की बात नहीं करते और इस क्षण में भी उनसे सहयोग की बात कर रहे हैं।

उन्नतीस अप्रैल को उच्च न्यायालय द्वारा राज्य विधानसभा में बहुमत परीक्षण का आदेश दिए जाने के बारे में रावत ने कहा कि वह प्रदेश के राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अदालत के आदेश के अनुपालन के लिए दिए जाने वाले निर्देशों का पालन करेंगे। यह पूछे जाने पर कि क्या वह अब दोबारा राज्य के मुख्यमंत्री बन गए हैं, रावत ने सीधा जवाब न देते हुए सिर्फ इतना कहा, हम वह हैं, जो लोग बनाते हैं। जो वे कहेंगे, हम बन जाएंगे। कांग्रेस के नौ बागी विधायकों के बारे में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि वह उन पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

राज्यपाल के सामने अपने समर्थक विधायकों की परेड कराए जाने के विषय में पूछे जाने पर रावत ने कहा कि इस विषय में वे अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं तथा वकीलों से राय-मशविरा के बाद ही कोई कदम उठाएंगे।

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