मुंबई: पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकी डेविड कोलमेन हेडली ने आज मुंबई की एक अदालत के समक्ष दावा किया है कि उसने अमेरिका में शिवसेना के लिए चंदा जुटाने की खातिर एक कार्यक्रम की व्यवस्था की थी और उसकी योजना तत्कालीन पार्टी सुप्रीमो बाल ठाकरे को उस आयोजन में बुलाने की थी। मुंबई पर 26/11 को हुए आतंकी हमलों के मामले में गवाह बने 55 वर्षीय हेडली ने अब्दुल वहाब खान द्वारा की जा रही जिरह के तीसरे दिन अमेरिका से एक वीडियो लिंक के जरिए ये बातें कहीं। अब्दुल वहाब खान वर्ष 2008 के इन हमलों के कथित प्रमुख साजिशकर्ता अबु जंदाल के वकील हैं। एक सवाल के जवाब में हेडली ने कहा कि उसने ठाकरे को इस कार्यक्रम में बुलाने की योजना बनाई थी। हेडली ने कहा, हां, लेकिन वह शुरूआती चरणों में थी। हेडली ने यह भी कहा कि ठाकरे को आमंत्रित करने के लिए कोई विशेष योजना नहीं बनाई गई थी।
आतंकी हमलों में अपनी भूमिका के चलते अमेरिका में दोषी करार दिए गए लश्कर के इस आतंकी ने कहा कि शिवसेना के एक व्यक्ति राजाराम रेगे ने उसे बताया था कि ठाकरे बीमार हैं और इसलिए शायद उनका पुत्र और अन्य अधिकारी कार्यक्रम में शिरकत कर सकते हैं। जब हेडली से पूछा गया कि क्या इस बात की जानकारी लश्कर को थी, तो उसने कहा कि उसने चंदा जुटाने के कार्यक्रम के बारे में आतंकी संगठन से चर्चा की थी। जब उससे पूछा गया कि क्या ठाकरे इस कार्यक्रम के बारे में जानते थे, तो हेडली ने जवाब दिया, मुझे यह कैसे पता होगा? मैंने राजाराम रेगे से बात की और उसने मुझे बताया कि उन्हें :ठाकरे को: सफर न करने की सलाह दी गई है।
हालांकि हेडली ने बचाव पक्ष के वकील की इस बात पर सहमति जताई कि उसने इस कार्यक्रम की चर्चा रेगे के साथ की थी। जब हेडली से पूछा गया कि क्या उसने रेगे को कहा था कि वह ठाकरे को इस आयोजन की जानकारी दे तो हेडली ने कहा कि मैंने सामान्य तौर पर कहा था लेकिन इस बारे में विशेष तौर पर नहीं कहा। हेडली ने अदालत को यह भी बताया कि बचपन से ही उसमें भारत और भारतीयों के प्रति नफरत पैदा हो गई थी और तब से ही वह ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना चाहता था। जब उससे इस नफरत के पीछे की वजह पूछी गई तो उसने कहा, वर्ष 1971 में भारतीय विमानों ने मेरे स्कूल पर बम बरसाए थे। उस समय मुझमें यह भावना पैदा हो गई। उसने कहा कि हमले में लोग मारे गए थे। मेरे लश्कर ए तैयबा के साथ जुड़ने की वजहों में एक वजह यह भी थी।
हेडली अमेरिका में 35 साल की कैद काट रहा है। उसने इस बात से इंकार किया है कि वह वर्ष 1988 से 2008 तक लगातार अमेरिकी जांच अधिकारियों के संपर्क में था। उसने इन आरोपांे से भी इंकार कर दिया कि अमेरिकी एजेंसियां उसे धन मुहैया करवा रही थीं। उसने कहा, यह बात कहना आधारहीन है कि मेरे पाकिस्तान जाने के बारे में अमेरिकी एजेंसियों को पता था। उसने यह भी कहा कि यह कहना भी गलत होगा कि 26:11 हमलों में उसकी भूमिका के चलते उसपर जुर्माने लगाने का आग्रह एफबीआई ने अमेरिकी अदालत में नहीं किया। उसने कहा, यह सच नहीं है। अदालत में जुर्मानों के लिए आग्रह करने का काम एफबीआई का नहीं है।