नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और मेडिकल सेंटरों में जन्म लेने वाले बच्चों के सेक्स रेश्यो में भारी अंतर की वजह से 89 हॉस्पीटल और सेंटरों को नोटिस देकर जवाब मांगा है। दिल्ली के कुछ प्राइवेट अस्पतालों में लड़कों का जन्म ज्यादा हो रहा है। एक अस्पताल ऐसा भी है जहां जन्म लेने वाले 10 बच्चों में से सात लड़के हैं। वहीं, दो अस्पताल ऐसे भी है जहां दस में 3-4 लड़कियां जन्म ले रही हैं, बाकी लड़के।
दिल्ली सरकार चाइल्ड सेक्स रेश्यों को लेकर गंभीर हो गई है। मेल और फीमेल सेक्स रेश्यो में अंतर में अगर अस्पतालों और सेंटरों की मिलीभगत पाई गई तो उनके खिलाफ सख्त एक्शन भी लिया जा सकता है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय ने प्रति हजार 285-788 के बीच रहे 89 अस्पतालों को नोटिस जारी करके 10 दिन में चार सवालों के जवाब मांगे हैं।
सेक्स रेश्यो में इतने भारी अंतर की वजह क्या?
दिल्ली सरकार के हेल्थ मिनिस्टर सत्येंद्र जैन ने कहा कि जिस तरह से सेक्स रेश्यो के आंकड़े सामने आए हैं, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि यह सब अचानक नहीं हुआ है। दिल्ली में इन 89 सेंटरों में लड़कियों का जन्म 1000 लड़कों के मुकाबले 800 से भी कम है, जबकि दिल्ली में औसतन 1000 लड़कों पर 896 लड़कियां है। मिनिस्टर ने साफ कहा कि अगर इसमें किसी की गलती सामने आई तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली का सेक्स रेश्यो पहले से ही गड़बड़ है, हमने इसका रिव्यू भी किया था। रिव्यू के बाद इन सेंटरों की जांच कराने का फैसला किया। इस जांच में काफी चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एक सेंटर पर प्रति हजार लड़कों के मुकाबले सिर्फ 285 लड़कियों का जन्म हुआ। दो सेंटरो पर 300-400 के बीच लिंगानुपात था। वहीं, सात सेंटरों पर 400-500 के बीच लिंगानुपात सामने आया है। लिंगानुपात कम रहने वाले इन अस्पतालों को नोटिस जारी किया गया है।
साथ ही मिनिस्टर ने पेरेंट्स से भी अपील की है कि वे गर्भ में पल रही बच्ची को सिर्फ इसलिए नहीं मार दे कि वो एक लड़की है।