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‘मरणोपरांत जेल का प्रावधान होता तो टैगोर भी कारावास में होते’

 Written By: Bhasha
 Published : Mar 01, 2016 09:10 am IST,  Updated : Mar 01, 2016 09:10 am IST

जेएनयू के प्रोफेसर रणबीर चक्रवर्ती ने यहां कहा कि गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के कई बयान राष्ट्रवाद के पंथ के खिलाफ हैं और यदि किसी को मरणोपरांत जेल में डालना संभव होता तो वह भी कारावास में होते।

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नयी दिल्ली: जेएनयू के प्रोफेसर रणबीर चक्रवर्ती ने यहां कहा कि गुरूदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर के कई बयान राष्ट्रवाद के पंथ के खिलाफ हैं और यदि किसी को मरणोपरांत जेल में डालना संभव होता तो वह भी कारावास में होते। विश्वविद्यालय के प्रशासनीय ब्लॉक में राष्ट्रवाद पर आयोजित व्याख्यान माला में चक्रवर्ती छात्रों को संबोधित कर रहे थे।

इस व्याख्यान माला का आयोजन उसी स्थान पर किया जा रहा है, जहां अफजल गुरू को फांसी देने के विरोध में कार्यक्रम किया गया था, जहां देश विरोधी नारे लगे थे। उसके बाद कुछ छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। जेएनयू के सेन्टर फॉर हिस्टोरिकल स्टडीज के प्रोफेसर ने कहा, यदि आप मरणोपरांत किसी को जेल में डाल पाते... जैसा कि आप भारत रत्न दे सकते हैं... राष्ट्रगान के लेखक रवीन्द्र नाथ टैगोर, भी वहीं होते। उनके कई बयान राष्ट्रवाद पंथ के खिलाफ हैं।

गौरतलब है कि यहीं देश विरोधी नारे लगे थे। उसके बाद कुछ छात्रों के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। वहीं जेएनयू के प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि कैंपस में फोटोकॉपी की दुकानों ने प्रशासन से सत्यापित नहीं कराए गए किसी भी पोस्टर का प्रिंट देने से मना कर दिया है। कैंपस में फोटोकॉपी की दुकानों के मालिकों ने दावा किया कि ‘डर’ से उन्होंने विरोध प्रदर्शनों का प्रिंट पोस्टर देने से मना किया लेकिन छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया है। जेएनयू के रजिस्ट्रार भूपिंदर जुत्सी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।

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