फिल्म ‘गदर’ में लाख कोशिशों के बावजूद जब सनी देओल को वीजा नहीं मिलता तो गुस्से में आकर कहते हैं... ‘अगर एक वीजा नहीं मिला तो क्या तारा सिंह पाकिस्तान नहीं जाएगा’... जो वीजा ‘तारा सिंह’ जैसे ताकतवर इंसान का रास्ता रोक सकती है... जिनका ढ़ाई किलो का हाथ जब पड़ता हैं तो आदमी उठता नहीं उठ जाता हैं.. जो पाकिस्तान जाकर हैंडपंप तक उखाड़ डालते हैं... एक वीजा ने उनका रास्ता रोक दिया... उसी दिन मैनें समझ लिया कि वीजा में बड़ी ताकत हैं भइया... ई किसी का भी रास्ता रोक सकत हैं बबुआ ... नए जमाने का दौर है चाहे कोई कितना ही बड़ा तुर्रम खां क्यों न हो... बिना वीजा के किसी को कहीं नहीं भेजा जा सकता... इन घटनाओं के बाद से में वीजा का उपासक हो गया भइया...वीजा के पुरुषार्थ पर मैं इतराने लगी.. या यूं कहें कि मैं वीजा के इश्क में बावरी हो गई...।
फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में सलमान खान जब मुन्नी को लेकर आते हैं तो गुस्से में लाल-पीले शरद सक्सेना (फिल्म में करीना कपूर के पिता) कहते हैं...’इसे पाकिस्तान वापस भेजने के लिए वीजा का प्रबंध करो’... गुणीजनों, सज्जनों, सुधीजनों इन दो घटनाओं ने मुझे ‘वीजा’ नामक वस्तु के बारे में गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया... अपन का वीजा जैसी चीजों से कभी वास्ता ही न रहा...गरीब जो ठहरे घर के बजट से अधिक सोच ही नहीं पाते लेकिन इन दिनों फिर भी मैं वीजा के ख्यालों में डूबा-डूबा सा रहने लगा जैसे कोई आशिक अपनी प्रेयसी के ख्यालों में डूबा रहता है कुछ उसी टाइप का...।
फिर इसी बीच एक खबर आई जिससे वीजा के प्रति मेरा लगाव और बढ़ गया... खबर थी कि जिन मोदी जी को अमेरिका ने वीजा देने से मना कर दिया था वही अमेरिका अब मोदी जी के कदमों में पड़ा है और बुलाकर खुद ही वीजा दे रहा है... सिर में हल्की सी खुजली करते हुए मंद-मंद मुस्कान के साथ मैनें सोचा... वाह री वीजा... तुम्हारी महिमा अपरंपार... मेरी जिंदगी की गाड़ी अपनी पटरी पर स्लो मोशन में चल रही थी... दूर देश जाने में या फिर वहां जाकर मदद करने का सुख कुछ खास तो होता ही होगा, मुहल्ले में किसी की मदद करने का सुख कुछ दिन ही रहता है, सो मैंने सबक लिया और मन-ही-मन प्रतिज्ञा कर डाली कि अगर मैनें किसी की मदद की और बदले में उसने एहसान चुकाने की बात की तो में उससे यही कहूंगा कि हे..!
सज्जन--- ‘एक ठू वीजा हमें भी दिला दो’... वीजा को लेकर मेरा मन शांत-चित्त कभी न हो पाया... लगातार होती घटनाओं से वीजा के प्रति मेरा एक अटूट रिश्ता कायम हो गया... दिसंबर 2015 की बात है... दुबई में रहने वाले भारत माहेश्वरी नामक शख्स ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह को ट्वीट किया वो अच्छे इलाज के लिए भारत आना चाहते हैं... लिहाजा उन्हें वीजा उपलब्ध कराया जाए... आनन-फानन में सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गईं... इस घटना को सुनकर मेरी आंखों में खुशी के आंसू आ गए... और मेरा मन-मयूर नाचने लगा...।
इसी कड़ी में अब नई खबर मुझे मिली है कि अनुपम खेर को पाकिस्तान ने वीजा देने से पहले मना किया फिर ना जाने क्या हुआ की वीजा का ऑफर कर दिया.. है... खेर साहब को कराची लिट्रेचर फेस्टिवल में शरीक होने जाना था, पाक ने उनका दिल दु:खा दिया... और वक्त ना होने के चलते उन्होंने पाक वीजा को धन्यवाद के साथ मना कर दिया,बोले ये तो वहीं हुआ की शोएब अख्तर ने यार्कर मारी और सचिन ने शानदार खेल दिखाते हुए गेंद बॉलर के पास वापस पहुंचा दी। खैर अपना मन बावरा ठहरा सोच में पड़ गया अमेरिका जिस लादने को खोजता फिर रहा था वह पाकिस्तान में मिला, भला उसको भी पाकिस्तान ने वीजा दे रखा था क्या अगर हां तो भाई उसकी कैटेगरी धांसू वाली होगी। डी कंपनी के आका अब नाम ना पूछो दुनिया जानती है, भारत और यूके सरकार बोल चुकी है पाकिस्तान में ही है, लेकिन पाकिस्तान ने उसे ना जाने कौन सा गुमशुदा वीजा जारी किया है,ना तो वह सामने आता है और ना पाक सरकार कबूल करती है।
लेकिन आजकल फरवरी जैसे माह में वीजा को लेकर जिस तरह की खबरें आ रही है उससे अपना मन डूबा डूबा सा रह रहा है, कल ही एक आशिक की खबर सुनी बंदे को फेसबुक पर चैट करते हुए लड़की से मोहब्बत हो गई,लड़की पड़ोस की नहीं पड़ोसी देश की निकली, भाई लो कर लो बात अब बिना वीजा के तो बात बननी नहीं। वह तो भला हो टिंडर का दूर से इश्क करने का पक्का इंतजाम कर रखा है, ना आएंगे सनम तेरी गली सायबर स्पेस में ही गाएंगे प्यार का तराना तू भी ऑनलाइन मिलने चले आना। ना वीजा की झंझट ना दु:खी होने का गम।
लेकिन बेचारे वीजा को लेकर इतनी सारी घटनाएं घटने के बाद मेरा तो क्या किसी भी भारतीय का वीजा प्रेम जाग सकता है... इसलिए मेरी तो 33 करोड़ देवी-देवताओं से हाथ जोड़कर यही गुज़ारिश है कि ‘एक ठू वीजा हमें भी दिला दो’ … मैं तो बावरी हो गई... मैं तो बावरी हो गई...हो सखी ! मैं तो वीजा के इश्क में बावरी हो गई ...
(इस व्यंग्य को युवा पत्रकार विशाल दूबे aka 3D ने लिखा है)