न्यूयॉर्क: भारत ने विकसित देशों से आग्रह किया है कि वे वर्ष 2020 से पहले की 'परिष्कृत' जलवायु कार्य योजना घोषित करें। साथ ही 100 अरब डॉलर जुटाने के काम की जिम्मेदारी अपने ऊपर लें। इसके अभाव में कार्बन उत्सर्जन में कटौती से जुड़े विकासशील देशों के राष्ट्रीय स्तर के योगदान संकल्प को लागू करने में बाधा आएगी।
जावड़ेकर ने कहा, क्योटो प्रोटोकॉल में सुधार करने की सख्त जरूरत
न्यूयॉर्क में 'मेजर इकोनॉमिक्स फोरम' के पहले सत्र को संबोधित करते हुए पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, "विकसित देशों को तत्काल क्योटो प्रोटोकॉल में सुधार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को वर्ष 2020 से पहले की बढ़ी हुई कार्य योजना पेश करनी चाहिए। दूसरा काम जो सबसे जल्द किया जाना है वह 100 अरब डॉलर एकत्र करना है। बगैर इसे जुटाए बहुत सारे विकासशील देश अपने राष्ट्रीय स्तर पर योगदान संकल्प को लागू नहीं कर पाएंगे।"
जल्दबाज़ी में लागू न हो पेरिस जलवायु समझौता
पेरिस जलवायु करार को एक ऐतिहासिक उपलब्धि करार देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि विकसित देशों द्वारा हर साल 100 अरब डॉलर जुटाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि बिना साधन के बहुत सारे देशों के योगदान फलदायी नहीं हो पाएंगे। पर्यावरण मंत्री ने यह भी कहा कि पेरिस जलवायु समझौते को लागू करने के लिए भारत को समय की जरूरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे जल्दबाजी में नहीं किया जाना चाहिए और सभी देशों को उनकी राष्ट्रीय प्रक्रियाओं का पालन करने की इजाजत देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेरिस समझौते को जल्दी लागू करने के बारे में बहस दुर्भाग्यपूर्ण है। जल्द सुधार की बात तो समझी जा सकती है लेकिन स्वीकृति की राष्ट्रीय प्रक्रिया के अनुसार इसमें समय लगेगा। उन्होंने कहा कि हम जल्दबाजी नहीं कर सकते क्योंकि पेरिस करार वर्ष 2020 के बाद लागू होना है।