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किशोर न्याय संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित

 Written By: IANS
 Published : May 08, 2015 07:33 am IST,  Updated : May 08, 2015 07:33 am IST

नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार को किशोर न्याय (संशोधन) विधेयक पारित हो गया। इस विधेयक के साथ जघन्य अपराध करने वाले 16-18 आयुवर्ग के किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाए जाने का प्रावधान का

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किशोर न्याय संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित

नई दिल्ली: लोकसभा में गुरुवार को किशोर न्याय (संशोधन) विधेयक पारित हो गया। इस विधेयक के साथ जघन्य अपराध करने वाले 16-18 आयुवर्ग के किशोरों पर वयस्कों की तरह मुकदमा चलाए जाने का प्रावधान का रास्ता साफ होगा। विपक्षी पार्टियों एवं बाल अधिकार से जुड़े विशेषज्ञों ने हालांकि इस कदम को घातक करार दिया और कहा कि सदन में पूर्ण बहुमत का सत्ता पक्ष ने उपयोग कर इसे पारित कराया।

किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं संरक्षण) विधेयक, 2014 संशोधन, मौजूदा किशोर न्याय अधिनियम, 2000 की जगह लेगा। अब राज्यसभा में इस विधेयक के सोमवार को पेश होने की उम्मीद है।

नए विधेयक में छोटे, गंभीर और जघन्य अपराधों को स्पष्ट तौर पर परिभाषित और श्रेणीबद्ध किया गया है। इसके साथ ही हर श्रेणी के अपराध के लिए विभेदित प्रक्रियाओं को भी परिभाषित किया गया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने अगस्त 2014 में लोकसभा में किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) विधेयक, 2014 पेश किया किया था।

विधेयक को एक स्थायी समिति को भेज दिया गया था, जिसने कानूनी तौर पर किशोर की उम्र 18 वर्ष रखने की सिफारिश की थी।

हालांकि, सरकार ने समिति की सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए, जघन्य मामलों में किशोर की उम्र घटाकर 16 साल करने का फैसला किया था।

बाल अधिकार विशेषज्ञ एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून संकाय में प्रोफेसर वेद कुमारी ने कहा, "यह संशोधन न्यायोचित नहीं है। इस विधेयक के पीछे की दलील मेरी समझ से परे है। यह घातक होगा।"

वकील करुणा नंदी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वयस्कों के साथ जेल भेजे जाने से किशोरों पर गलत प्रभाव पड़ेगा।

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