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शनि शिंगणापुर मंदिर विवाद: श्री श्री ने कहा, तीन फुट दूर से दर्शन करें महिला और पुरुष

 Written By: India TV News Desk
 Published : Feb 08, 2016 05:57 pm IST,  Updated : Feb 08, 2016 05:57 pm IST

नई दिल्ली: शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पिछले दिनों हुए विवादों को सुलझाने के लिए आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने मंदिर ट्रस्ट के सामने प्रस्ताव रखा है कि सिर्फ पुजारी

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नई दिल्ली: शनि शिंगणापुर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर पिछले दिनों हुए विवादों को सुलझाने के लिए आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर ने मंदिर ट्रस्ट के सामने प्रस्ताव रखा है कि सिर्फ पुजारी ही शनि देव के चबूतरे पर चढ़कर पूजा करेंगे। इससे यह उम्मीद की जा रही है कि यह मामला जल्द ही सुलझ जाएगा। लेकिन भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने कहा है कि इस बैठक ले कोई नतीजा नहीं निकला है।

 

रविवार को बैठक के बाद श्री श्री रविशंकर ने कहा कि शनि शिंगणापुर मंदिर ट्रस्ट और भूमाता रणरागिनी ब्रिगेड में सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि अब सिर्फ पुजारी ही चबूतरे पर चढ़कर पूजा कर सकेंगे। मंदिर में पुरुषों का प्रवेश भी निषेध होगा। सभी लोग मंदिर के बाहर से दर्शन करेंगे। श्री श्री ने बताया कि शनि देव की शिला पर तिलाभिषेक भी मशीन के जरिये होगा।

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प्रस्ताव में लिखा है कि मंदिर के गर्भग्रह में महिलाओं को जाने की अनुमति हो या फिर पुरूषों का प्रवेश भी निषेध हो। महिलाओं का कहना है कि जब वे काशी विश्वनाथ मंदिर और तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रवेश कर सकती हैं, तो शनि मंदिर में क्यों नहीं। महिलाओं का कहना है मंदिर ट्रस्ट अपने नियम नहीं तोड़ रहा है। मंदिर ट्रस्ट चाहता है कि मंदिर के गर्भ में केवल पुजारी ही जाएं। दूसरी ओर मंदिर ट्रस्ट 11 हजार रुपये देकर चबूतरे पर चढ़कर तिलाभिषेक करने की व्यवस्था खत्म करने के लिए भी तैयार नहीं है। तृप्ति देसाई ने अपनी मांग दोहराते हुए कहा कि महिलाओं को चबूतरे पर चढ़कर पूजा करने का अधिकार दिया जाना चाहिए। उधर, श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि ऐसा नहीं है कि यदि आप कुछ दूरी से दर्शन करोगे, तो आप पर भगवान की कृपा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सभी महिला एवं पुरूष तीन फुट की दूरी से शनि देवता के दर्शन कर सकेंगे। आध्यात्मिक गुरू ने महिला पुजारी होने की भूमाता ब्रिगेड की मांग का समर्थन किया।

देसाई ने कहा कि उन्होंने रविशंकर से कहा है कि महिलाओं के चबूतरे पर चढने से रोक की परंपरा 400 साल पुरानी होने की बात कहना गलत है। यह पूछे जाने पर कि उनकी भावी योजना क्या है क्योंकि वह आध्यात्मिक गुरू द्वारा प्रस्तावित हल से प्रसन्न नहीं हैं, देसाई ने कहा कि वह अगले हफ्ते मुख्यमंत्री के साथ होने वाली अपनी बैठक का इंतजार कर रही हैं। उन्हें उम्मीद है कि फडणवीस महिलाओं के हितों का समर्थन करते हुए समुचित निर्णय करेंगे। इस बीच मंदिर के एक न्यासी ने कहा कि महिला एवं पुरूष दोनों पर समान रूप से रोक लगाने से पहले महिलाओं को अंतिम पूजा करने की अनुमति देना संभव नहीं हो पाएगा।

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