नई दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सीबीआई से कहा है कि सरकार के शीर्ष पद पर होने के नाते उनके पास चिंता के कई अन्य विषय थे और कोयला ब्लाक आवंटन पर हर दिशानिर्देश को जानना और याद रखना व्यवहारिक रूप से संभव नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर कोयला मंत्री के रूप में फैसले से इन निशानिर्देशों का कोई संबंध था तो तत्कालीन कोयला सचिव पीसी पारेख को उन्हें इन दिशानिर्देशों के बारे में बताना चाहिए था। वर्ष 2005 में हिंडाल्को को कोयला ब्लाक के आवंटन के मुद्दे पर चर्चा के दौरान कोयला मंत्रालय की जिम्मेदारी सिंह के पास ही थी।
उन्होंने कहा कि कोयला ब्लाक के आवंटन के लिए हिंडाल्को के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला द्वारा लिखित पत्र पर उन्होंने पारेख की सलाह के अनुसार कदम उठाया। सिंह ने कहा कि पारेख उस पत्र पर मुझे सलाह देने के लिए सर्वश्रेष्ठ योग्य व्यक्ति थे। हिंडाल्को को कोयला ब्लाक आवंटित करने में कथित घोटाले की जांच कर रही सीबीआई के सामने जनवरी में दर्ज अपने बयान में उन्होंने कहा कि वह ओडिशा के तालबीरा दो कोयला ब्लाक आवंटन में निजी फर्म को मदद करने के दबाव में नहीं थे। एक विशेष अदालत ने इस संबंध में उन्हें आरोपी के रूप में तलब किया था।
सिंह ने कहा कि इस मुद्दे पर फैसला करने में कोई गैरजरूरी जल्दबाजी नहीं थी और तालबीरा दो और तीन कोयला ब्लाक के आवंटन पर अंतिम फैसला पारेख की जांच और सिफारिश के आधार पर किया गया जिसे पीएमओ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी मंजूरी दी। उच्चतम न्यायालय ने एक अप्रैल को सिंह और उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला तथा पूर्व कोयला सचिव पीसी पारेख सहित अन्य को इस मामले में आरोपी के रूप में तलब करने के निचले अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी। उस समय कोयला मंत्री रहे सिंह से इस साल 19 जनवरी को सीबीआई ने पूछताछ की थी क्योंकि निचली अदालत ने 16 दिसंबर 2014 को एजेंसी को इस मामले में उनसे पूछताछ का निर्देश दिया था।
सिंह ने जांच अधिकारी से कहा कि वर्ष 2005 में कोयला ब्लाक आवंटन के लिए लागू कोयला मंत्रालय द्वारा तैयार संबंधित दिशानिर्देशों, खासकर उन पक्षों के लिए जिन्हें उनकी परियोजनाओं के लिए पहले ही पर्याप्त कोयला लिंकेज आवंटित किया जा चुका है, के बारे में पूछे जाने पर, मैं कहता हूं कि मुझे संबंधित दिशनिर्देश याद नहीं हैं। सिंह ने अपने बयान में कहा, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर, मेरे लिए चिंता करने के लिए कई अन्य विषय थे और मेरे लिए इन दिशानिर्देशों को जानना और याद रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था। अगर इन दिशानिर्देशों का संबंध कोयला मंत्री के रूप में फैसला करने पर है तो अपने नोट, रिपोर्ट में इन दिशानिर्देशों पर प्रकाश डालने की जिम्मेदारी सचिव (कोयला) की है। इस बयान को सीबीआई द्वारा अदालत के सामने आधिकारिक रूप से रखा गया।