1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. मुफ्ती मोहम्मद सईद: युवा वकील से एक सौम्य राजनेता तक का सफर

मुफ्ती मोहम्मद सईद: युवा वकील से एक सौम्य राजनेता तक का सफर

 Written By: Bhasha
 Published : Jan 07, 2016 11:06 am IST,  Updated : Jan 07, 2016 11:06 am IST

एक गूढ़ वकील से लेकर देश के अब तक के एकमात्र मुस्लिम गृहमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद ने एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह राष्ट्रीय राजनीति और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपने लिए एक अलग मुकाम बनाया।

mufti mohammad sayeed- India TV Hindi
mufti mohammad sayeed

श्रीनगर: एक गूढ़ वकील से लेकर देश के अब तक के एकमात्र मुस्लिम गृहमंत्री बनने तक का सफर तय करने वाले मुफ्ती मोहम्मद सईद ने एक मंझे हुए राजनीतिक खिलाड़ी की तरह राष्ट्रीय राजनीति और जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अपने लिए एक अलग मुकाम बनाया। लगभग छह दशक तक के अपने राजनीतिक करियर में सईद ताकतवर अब्दुल्ला परिवार के खिलाफ प्रतिद्वंदी शक्ति का केंद्र बनकर उभरे। राजनीति के खेल में हमेशा अपने पत्ते छिपाकर रखने वाले सईद अपने राजनीतिक एजेंडे के अनुरूप चलने के लिए विरोधाभासी विचारधाराओं वाले दलों के साथ भी दोस्ती में गुरेज नहीं करते थे।

सईद के राजनीतिक सफर मैं दो सबसे अहम पड़ाव वर्ष 1989 और वर्ष 2015 में आए। वर्ष 1989 में वह स्वतंत्र भारत के पहले मुस्लिम गृहमंत्री बने और बीते साल वह दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने। आगामी 12 जनवरी को 80 साल के हो जाने वाले सईद ने इस बार जम्मू-कश्मीर की सत्ता संभालने के लिए उस भाजपा के साथ गठबंधन किया, जिसके लिए इस मुस्लिम बहुल राज्य में सत्ता में आने का यह पहला मौका था।

सईद ने गृहमंत्री के रूप में पदभार उस समय संभाला था, जब उनके इस गृहराज्य में आतंकवाद ने अपने घिनौना रूप दिखाना शुरू किया था। गृहमंत्रालय में उनके इस कार्यकाल को जेकेएलएफ द्वारा उनकी तीसरी बेटी रूबइया के अपहरण किए जाने के साथ जोड़कर याद किया जाता है। आतंकियों ने रूबइया की रिहाई के बदले में अपने पांच साथियों को छोड़ने की मांग की थी और अपनी मांग पूरी होने पर ही रूबइया को छोड़ा था।

सईद के प्रतिद्वंद्वियों के अनुसार, इस अपहरण और फिर आतंकियों की रिहाई ने पहली बार भारत को एक कमजोर देश के रूप में पेश किया।

 

अनंतनाग जिले में बिजबेहड़ा के बाबा मोहल्ला में 12 जनवरी 1936 को जन्मे सईद ने प्राथमिक शिक्षा एक स्थानीय स्कूल में ग्रहण की और उन्होंने श्रीनगर के एस पी कॉलेज से स्नातक किया। उन्हौंने अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय से कानून की एक डिग्री और अरब इतिहास में स्नातोकत्तर की डिग्री प्राप्त की।

उन्होंने 1950 के दशक के आखिर में जी एम सादिक की डेमोक्रेटिक नेशनल कांफ्रेंस में शामिल होकर राजनीति की दुनिया में कदम रखा। सादिक ने युवा वकील की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें पार्टी का जिला संयोजक नियुक्त किया।

सईद 1962 में बिजबेहड़ा से राज्य विधानसभा में चुने गए। उन्होंने पांच साल बाद भी इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा। उन्हें सादिक ने उप मंत्री नियुक्त किया। सादिक उस समय मुख्यमंत्री थे। हालांकि वह कुछ साल बाद पार्टी से अलग हो गए और इंडियन नेशनल कांग्रेस ने शामिल हो गए जो ऐसे समय में एक साहसिक लेकिन जोखिम भरा कदम था जबकि जेल में बंद शेख मोहम्मद अब्दुल्ला को अधिकतर कश्मीरियों का भारी समर्थन प्राप्त था।

एक दक्ष आयोजक और प्रशासक समझे जाने वाले सईद ने यह सुनिश्चित किया कि कांग्रेस घाटी में न केवल अपने पैर जमाए बल्कि उन्होंने पार्टी के लिए भारी समर्थन भी पैदा किया। वह 1972 में एक कैबिनेट मंत्री और विधान परिषद में कांग्रेस दल के नेता बने। उन्हें दो वर्ष बाद कांग्रेस की राज्य इकाई का अध्यक्ष बनाया गया।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत