नई दिल्ली: 12 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलने वाले बिहार विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरु हो गया है। चुनाव आयोग द्वारा चुनाव की घोषणाओं के बाद से ही उठापटक का दौर भी शुरु हो गया है। महागठबंधन से तकरार के बाद नीतीश और लालू खेमे से अलग हुए मुलायम सिंह अब तीसरा मोर्चा बना चुके हैं। मुलायम सिंह अब शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और समाजनादी जनता दल- लोकतांत्रिक नाम की क्षेत्रीय पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। इस हिसाब से अब मुलायम महागठबंधन और एनडीए से सीधी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं।
बन रहे दावेदार लेकिन फीका जनाधार-
बिहार चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि एनसीपी और समाजवादी पार्टी दोनों पार्टियों का ही बिहार में कोई जनाधार नहीं है, लेकिन दोनों ही बिहार के प्रमुख दावेदारों के वोट काटने का जरूर माद्दा रखते हैं। अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो दोनों ही पार्टियों को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। वहीं अगर पिछले लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो एनसीपी मुश्किल से एक सीट जीतने में कामयाब रही थी। अगर राजनीति की भाषा में समझा जाए तो ये दोनों पार्टियां माई (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक में सेंध लगाकर लालू-नीतीश के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ही गठबंधन सहयोगियों के मनमुटाव सामने आने का दौर शुरु हो चुका है। महागठबंधन में मुलायम के अलावा एनडीए में मांझी और पासवान भी अपनी नाराजगी जता चुके हैं।