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मुशर्रफ के बदले सुर कहा पाक को छोटा नहीं बराबर का समझे भारत

 Written By: India TV News Desk
 Published : Aug 07, 2015 11:12 pm IST,  Updated : Aug 08, 2015 12:43 am IST

नई दिल्ली: पाकिस्तान के फॉर्मर प्रेसीडेंट जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक बार फिर कश्मीर का राग छेड़ा है। परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब बॉर्डर पर अमन

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मुशर्रफ के बदले सुर, पाक को छोटा ना समझे भारत

नई दिल्ली: पाकिस्तान के फॉर्मर प्रेसीडेंट जनरल परवेज मुशर्रफ ने एक बार फिर कश्मीर का राग छेड़ा है। परवेज मुशर्रफ ने कहा है कि भारत के साथ बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब बॉर्डर पर अमन चैन होगा। जब कश्मीर का मसला हल होगा। परवेज मुशर्रफ ने कहा इस प्रॉब्लम का हल तभी संभव है जब बात बराबरी पर हो लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है क्योंकि मुशर्रफ के मुताबिक- मोदी सरकार पाकिस्तान को दबाना चाहती है। मुशर्रफ ने धमकी भरे अंदाज में कहा कि जब तक कश्मीर का हल नहीं निकलेगा। तब तक लड़ाई चलती रहेगी।

मुशर्रफ ने कहा जब हम यूएन में कश्मीर को ले जाते थे तो उन्होंने कहा कि बाइलैट्रल बात करेंगे। हर चीज वन ऑन वन होगी लेकिन जब जाते हैं और कश्मीर की बात करते हैं तो कहते हैं भाग जाओ। तो ये कैसा बाइलैट्रल। तो क्या करें।! उनकी इंटरनेशनल क्लाउड काफी है तो वो कोई भी ऐसा नहीं है जो बीच में इन्वॉल्व होकर इस मसले को हल करे। ये बाइलैट्रली होगी और हमें इसका पूरी तरीके से एहसास होना चाहिए। हम भी ताकतवर मुल्क है। हम sovereign equality के मुताबिक हल की तरफ जाएंगे वर्ना लड़ते रहेंगे।

पाकिस्तान को छोटा नही बराबर का समझे भारत-

मुशर्रफ ने कहा कि बातचीत के लिए हिंदुस्तान को आगे आना चाहिए। उसे पहल करनी चाहिए और पाकिस्तान को बराबर का समझकर उससे बात करनी चाहिए। अगर पाकिस्तान को छोटा समझा जाएगा। तो फिर किसी प्रॉबल्म का सॉल्यूशन नहीं निकलेगा।

भारत बड़ा है उसको कंप्रोमाइज की शुरुआत करनी चाहिए-

मैं एंटी इंडिया नहीं हूं। हिंदुस्तान पर मुद्दे हल करने की जिम्मेदारी है। उनकी बड़ी फौज है। जो बड़ा होता है उसी को शुरुआत करनी होगी। उसी को कंप्रोमाइज करना होगा। अगर छोटा दिखाए तो निगेटव बात होती है। हिंदुस्तान पर दारोमदार है कि वो हमें शांति की ओर लेकर चले। मुद्दे हल करने की कोशिश करे लेकिन ये नहीं होगा। वो हमें दबाकर हल मांग रहे हैं। वो कहते हैं कश्मीर की बिल्कुल बात मत करो वो तो मैंने शुरू की थी वर्ना कश्मीर कहीं था ही नहीं। हिंदुस्तान को सोचना होगा। पाकिस्तान की रिएलिटी को एक्सेप्ट करें। इन डिस्प्यूट्स को हल करने के लिए सिंसियेरिटी दिखाएं जो वो नहीं करते।

हालांकि आज मुशर्रफ का अंदाज थोड़ा बदला दिख रहा था। अब तक वो हिन्दुस्तान को दुश्मन बताकर बात करते थे। आज भारत पाकिस्तान को बड़ा भाई और छोटा भाई बता रहे थे। जनरल मुशर्रफ ने आज आगरा समिट की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि उस वक्त समझौता हो जाता लेकिन लालकृष्ण आडवाणी ने अडंगा लगाया। मुशर्रफ ने कहा कि दोनों पक्षों को अपने अपने स्टैंड से थोड़ा पीछे हटना होगा तभी समस्या का हल होगा।

जो मुशर्रफ बार बार खुद भारत को एटम  बम की धमकी देते थे। आज उन्ही मुशर्रफ ने कहा कि एटम बम की बात करना बेवकूफी है। न्यूक्लियर वैपन का इस्तेमाल कोई बच्चों का खेल नहीं हैं। पाकिस्तान को अपनी आर्मी मजबूत करनी चाहिए। लेकिन बार बार एटम बम की बात करना ठीक नहीं है।

हम न्यूक्लियर पावर को इस्तेमाल करने की सोच नहीं रख सकते-

ये न्यूक्लियर पावर एक डिटरेंस होती है। अगर आप समझते हैं कि हम बाकी फौज कम कर दें और इंडिया आएगा और हम न्यूक्लियर मार देंगे, नहीं ऐसे नहीं होता। नहीं ये मजाक नहीं है। न्यूक्लियर पावर को इस्तेमाल करने की सोच नहीं कर सकते क्योंकि ये जो हीरोशिमा, नागासाकी में पांच किलोटन थे। हमारे पास उसके सौ गुना ज्यादा बम पड़े हुए हैं। ये कोई कर सकता है नहीं कर सकता अगर न्यूक्लियर इश्यू को एवॉइड करना है तो हमारी कनवेंशनल फौज होनी चाहिए उनके मुकाबले में न्यूक्लियर पर जाएं ना न्यूक्लियर मारना अक्लमंदी नहीं है।

पाकिस्तानी इस्टेब्लिशमेंट में इस वक्त मुशर्रफ की बात को कोई तवज्जो नहीं देता। मुशर्रफ कभी एग्रेसिव होकर बयान देते हैं तो कभी खुद को शान्ति का दूत बनाकर पेश करते हैं। सच्चाई ये है कि मुशर्रफ ने ही वाजपेयी की बस डिप्लोमेसी को डिरेल करने के लिए कारगिल में युद्ध करवाया था।

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