नई दिल्ली: लोकतंत्र को बचाने के लिए देश को संघ मुक्त करने के नीतीश कुमार के आवाह्न पर पलटवार करते हुए भाजपा ने कहा कि आरएसएस के आलोचकों को कम से कम एक बार उसकी शाखा में भाग लेना चाहिए ताकि उनकी गलत धारणाएं मिट सकें। पार्टी ने स्पष्ट किया कि उसका मुकाबला करने के लिए एक संयुक्त मोर्चा बनाने के प्रयासों से उस पर कोई प्रभाव नहीं पडता। उसने कहा कि मोदी सरकार को देश के विकास एवं गरीबों के लिए काम करने से रोकने के ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।
भाजपा प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बिहार की नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में जंगल राज के दिन फिर से लौट आए हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई जदयू नेता की राष्ट्रीय महत्वकांक्षाओं से अवगत है। कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए शर्मा ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या राहुल गांधी ऐसे मोर्चे का नेतृत्व करेंगे अथवा उसके महज हिस्सा होंगे। उन्होंने कहा, नीतीश कुमार ने आरएसएस मुक्त भारत की बात कही है। आप संघ के लोगों के साथ काफी लम्बे समय तक रहे हैं। आपका भाजपा के साथ लंबा गठबंधन रहा है और आप भाजपा के कार्यक्रमों में भाग भी लेते रहे हैं। आप ने संघ मुक्त भारत की भी बात कही है। बेहतर होगा कि आप संघ को थोड़ा देखें और समझें।
शर्मा ने कहा, उसके लिए संघ की शाखा में जाना सर्वोत्तम होगा। जो लोग देश में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का विरोध करते हैं उन्हें कम से कम एक बार उसकी शाखा में जाना चाहिए। उन्होंने कहा, उस के बाद ही उनकी समझ बेहतर हो सकेगी और उनकी गलत धारणा दूर हो सकेगी। उसके बाद ही उनके साफ्टवेयर में तकनीकी खामियां दूर हो सकेंगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आरएसएस ने सदैव देश के हित के लिए काम किया है। नीतीश के जदयू ने 2013 में भाजपा के साथ अपने 17 साल पुराने संबंधों को तोड़ लिया था क्योंकि वह 2014 के आम चुनावों में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की विरोधी थी।