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Budget 2016: पिछले 30 सालों में ऐसा हुआ पहली बार!

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 01, 2016 08:28 am IST,  Updated : Mar 01, 2016 08:28 am IST

हाल के वर्षो में पहली बार ऐसा हुआ है कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में रक्षा क्षेत्र का उल्लेख ही नहीं किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2016-17 का जो बजट पेश किया उसमें कुल बजट का 12.59 फीसदी यानी 2 लाख 49 हजार 99 करोड़ रुपये

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नई दिल्ली: हाल के वर्षो में पहली बार ऐसा हुआ है कि वित्त मंत्री ने बजट भाषण में रक्षा क्षेत्र का उल्लेख ही नहीं किया। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2016-17 का जो बजट पेश किया उसमें कुल बजट का 12.59 फीसदी यानी 2 लाख 49 हजार 99 करोड़ रुपये का प्रावधान रक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है। इनमें 82 हजार 332.66 करोड़ पेंशन भोगी रक्षाकर्मियों के लिए है। इसी से 'वन रैंक वन पेंशन' योजना की बड़ी रकम का भी भुगतान होगा। रक्षा बजट का कुल प्रावधान वर्ष 2015-16 के संशोधित आकलन 2 लाख 24 हजार 636 करोड़ रुपये से 10 फीसदी अधिक है।

2 लाख 49 हजार 99 करोड़ रुपये में से 1 लाख 62 हजार 759 करोड़ राजस्व खर्च के मद में है, जिसके तहत आयुध कारखाने, शोध एवं विकास, राष्ट्रीय राइफल्स, एनसीसी आदि भी आते हैं। पूंजीगत व्यय के लिए 86 हजार 340 करोड़ रुपये का प्रावधान है। तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए अगले बजट में 78586 करोड़ रुपये प्रदान किए गए हैं। यह राशि पहले से बड़ी है। लेकिन सेना में तोपो और अन्य उपकरणों की भारी कमी है। तो नौसेना एवं वायुसेना के अपने आधुनिकीकरण कार्यक्रम चल रहे हैं। आधुनिकीकरण बजट में कुल 4287 करोड़ रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। वहीं राफेल विमानों समेत रक्षा मंत्रालय के 86 महत्वपूर्ण सौदे अगले वित्तीय वर्ष के दौरान होने की संभावना है। इन सौदों के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये चाहिए। जाहिर है कि इस आवंटन में यह संभव नहीं है। इसलिए इन सौदों के लिए अलग से मंजूरी प्रदान करनी होगी।

केंद्र सरकार कुल बजट का 17.2 फीसदी रक्षा मंत्रालय पर खर्च कर रही है। इस बार कुल बजट 19.78 लाख करोड़ का है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च स्टडीज की रिपोर्ट के अनुसार भारत अपनी जीडीपी का 2.5 फीसदी बजट रक्षा पर खर्च करता है। हालांकि जीडीपी के हिसाब से चीन का व्यय महज 2.1 फीसदी है। लेकिन चीन की जीडीपी का आकार बढ़ा होने के कारण उसका वास्तविक व्यय ज्यादा है।

रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल अफसीर करीम (सेवानिवृत्त) के अनुसार सैन्य बजट में दस फीसदी की बढ़ोत्तरी संतोषजनक नहीं है। कारण यह है कि जब एक तरफ इस साल अनेक सैन्य साजो सामान की खरीद होनी है तो यह आवंटन बेहद कम है। दूसरा इसका एक बड़ा हिस्सा पेंशन पर खर्च होना है। इसी प्रकार माउंटेन स्ट्राइक कोर जैसी महत्वाकांक्षी योजना के लिए अलग बजट आवंटित किए जाने की जरूरत अरसे से महसूस की जा रही है। चीन और पाकिस्तान की चुनौतियों को किसी भी रूप में नजरंदाज नहीं किया जा सकता।

रक्षा विशेषज्ञ एवं सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडी के निदेशक सी उदय भास्कर ने कहा कि यह हैरत की बात है कि वित्त मंत्री ने अपने बजट में रक्षा क्षेत्र का उल्लेख ही नहीं किया। ऐसा पिछले 30 सालों में पहली बार हुआ है।

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