नई दिल्ली: वन रैंक, वन पेंशन की मांग को लेकर 61 दिनों से प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों को आज सुबह जंतर- मंतर से दिल्ली पुलिस द्वारा जबरदस्ती हटाए जाने के बाद रिटायर्ड सैन्य अफ़सर भी समर्थन देने के लिए जंतर-मंतर पर जुटना शुरू हो गए।
प्रदर्शन कर रहे पूर्व सैनिकों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया और धरनास्थल छोड़ने से इनकार कर दिया जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने पूर्व सैनिकों को आश्वासन दिया है कि उन्हें हटाया नहीं जाएगा।
वहीं एनसीपी नेता तारिक अनवर ने पूर्व सैनिकों के साथ हुई बदसलूकी को अन्याय करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सबको शांति से विरोध प्रदर्शन का हक है।
तारिक अनवर का कहना है कि ये अन्याय है, लोकतन्त्र में सबको शांति से प्रोटेस्ट करने का हक है, सरकार ने ये आलोकतांत्रिक काम किया है।
इससे पहले, केंद्रीय सूचना प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन राठौर ने कहा था कि वन रैंक वन पेंशन से सरकार का भावनात्मक जुड़ाव है और इसकी घोषणा जल्द की जा सकती है।
इस बयान के बाद अटकलें लगने लगी थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को लाल किले की प्राचीर से इसकी घोषणा कर सकते हैं।
पूर्व सैनिक इस मसले को लेकर 60 दिन से जंतर मंतर पर धरना दे रहे हैं। शुक्रवार सुबह सुरक्षा के मद्देनज़र जंतर-मंतर को खाली कराया जा रहा था और धरने पर बैठे पूर्व सैनिकों को भी वहां से हटाने की कोशिश की गई।
दरअसल, भूख हड़ताल पर बैठे कुछ पूर्व सैनिकों ने वहां से हटने से इनकार किया था, जिसके बाद उन्हें धक्का दिया गया और घसीटकर हटाने की कोशिश की गई। एनडीएमसी के ट्रकों को पूर्व सैनिकों द्वारा लगाए गए एक टेंट को उखाड़ते हुए देखा गया।