
स्टिंग-
संतोष- क्या हुआ ?
रिपोर्टर- ये लोग आ जाते हैं मोटरा-मोटरी लेकर बिहार से ?
संतोष- अच्छा आई डी नहीं होगा ?
रिपोर्टर- वोटर आईडी था लेकिन जब जाते हैं तो सब मार लेता है ?
संतोष- तो एफआईआर तो हो जाएगा ?
रिपोर्टर- एफआईआर तो वहां होगा ना जहां है उधर?
संतोष- आजकल आनलाइन हो जा रहा है
रिपोर्टर- हो जाएगा आईडी मांगेगा तो ?
संतोष- एफआईआर दर्ज है पुलिस का नोटिस है तो आईडी क्या मांगेगा आईडी जब चोरी हो गया तभी तो एफआईआर मंगवाया हूं दिल्ली पुलिस का।
रिपोर्टर- बना दो
रिपोर्टर- (14.56) किसके नाम से दीजिएगा
संतोष- नाम तो किसी और का होगा। नाम तो बता दूंगा क्या नाम है?
रिपोर्टर- दूसरे के नाम से कोई दिक्कत तो नहीं होगा ना भाई ?
संतोष- उनके नाम से एनसीआर काट दूंगा वही नाम बताना है आपको। यही आधा घंटा के बाद 2000 में मिलेगा 1400 रूपए में मिल रहा है आपको
डील फाइनल होते ही एजेंट किसी और के नाम का टिकट लाने के लिए अपने एक साथी को भेज देता है। कुछ देर के बाद इस एजेंट का साथी टिकट लेकर आता है उसके बाद शुरू होता है उस ट्रैवल एजेंट का टिकट बेचने का नायाब तरीका।
स्टिंग-
अजीत(8.57)- इनके पापा का नाम क्या है जो जा रहे हैं
रिपोर्टर- मोइनुद्दीन
संतोष- मोइनुद्दीन नहीं चलेगा ऐसा करो मोइनुद्दीन की जगह पर मुकेश शर्मा कर दो
रिपोर्टर- जो उसमें लिखा हुआ रहेगा वही बोलेंगे ना
अजीत- अड्रेस
रिपोर्टर- मिन्टो रोड लाल क्वार्टर
संतोष- लाल क्वार्टर डाल दो 203 मिन्टो रोड
दिल्ली पुलिस के नाम से फ़र्ज़ीवाड़ा, कन्फर्म टिकट के लिए फ़र्ज़ी FIR
अब इस दलाल ने हमारी आंखों के सामने जो किया वो हैरान करने वाला था। एजेंट ने अपने कंप्यूटर में अपलोड दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के वेबसाइट से एक फर्जी एनसीआर बनाया। दिल्ली पुलिस की साइट का गलत इस्तेमाल कर महज कुछ ही सेकेंड में अपने प्रिंटर से इसने हमारे दस्तावेज खो जाने का दिल्ली पुलिस का एक इन्फार्मेशन रिपोर्ट दे दी। इस रिपोर्ट सबकुछ फर्जी है नाम पता पहचाना और इससे बनानेवाले भी पुलिसवाले नहीं बल्कि टिकट का एक काला कारोबारी है।
स्टिंग-
संतोष(12.48)-लीजिए सर दिल्ली एनसीआर पुलिस रिपोर्ट भी आ गया क्राइम ब्रांच का
रिपोर्टर- नाम क्या बताना होगा इसका?
संतोष- राकेश शर्मा s/o मुकेश शर्मा लाल क्वार्टर। नाम पूछेगा खाली दिल्ली पुलिस का स्टाम्प लगा हुआ है। दिल्ली पुलिस का मोनोग्राम लगा हुआ है इससे बड़ा प्रूफ क्या होगा।
ऑपरेशन पहाड़गंज का ये सबसे चौंकानेवाला खुलासा है कि टिकट बेचनेवाला एक दलाल दुकान में बैठे बैठे आपको दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच का एक फर्जी इंफॉरमेशन रिपोर्ट दे देता है। हमारे अंडर कवर रिपोर्टर ने ट्रैवेल एजेंट के फर्जीवाड़े की जांच दोबारा करने की ठानी। हमारे मन में सवाल था कि क्या दिल्ली पुलिस की वेबसाइट का इस्तेमाल ये धड़ल्ले से करता है या फिर कुछ मामलों में ही ये तरीका अपनाया जाता है। इसबार हमने एसकेटी ट्रैवल्स के संतोष से वाराणसी जाने के लिए दो टिकटों की मांग की।
इसके बाद एक बार फिर दलाल के कंप्यूटर से दिल्ली पुलिस का एनसीआर निकाला गया जिसमें लिखा गया कि बैग के साथ मेरे सभी आईडी चोरी हो गए। एनसीआर बनाने के साथ ही ये दलाल बकायदा ये भी समझाता है कि टिकट चेंकिंग के दौरान टीटी से क्या कहना है कैसे कहना है।
यानी साफ है कि दलाल ने जो एनसीआर दिया था उसे देखकर दोनों टीटी को फर्जीवाड़े का जरा भी शक नहीं हुआ। जबकि इस एनसीआर पर जिस थाने का नाम लिखा है वैसा कोई पुलिस स्टेशन नई दिल्ली क्षेत्र में है ही नहीं। क्राइम ब्रांच के इस एनसीआर पर आखिर किसी टीटी को शक क्यों नहीं होता ये बड़ा सवाल है। सवाल ये है कि क्या दिल्ली पुलिस को भी इसकी भनक नहीं है। क्या दिल्ली पुलिस दलाल और टीटी सबको इस गोरखधंधे का पता है और ये धंधा तीनों की रजामंदी से चल रहा है।