नई दिल्ली: पाकिस्तान ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पठानकोट हमले का मास्टर माइंड मसूद अजहर को हिरासत में ले लिया है औऱ उससे पूछताछ चल रही है। पाकिस्तानी चैनल जियो न्यूज के हवाले से खबर मिली है कि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख समेत 12 लोगों को हिरासत में लिया गया है। गौरतलब है कि मसूद अजहर पठानकोट हमले का मुख्य आरोपी है। मसूद अजहर के भाई को भी हिरासत में लिया गया है।
कौन है मसूद अजहर
जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन है जिसका लक्ष्य शरिया कानून के अनुसार कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना है। इस संगठन की स्थापना मसूद अज़हर ने साल 2000 में की थी। मसूद अज़हर पाकिस्तान का नागरिक होने के साथ-साथ हरकत-ए-मुजाहिद्दीन का सदस्य भी है। मसूद अजहर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है। इसे 17 साल पहले 1999 में कंधार विमान अपहरण मामले में भारत ने रिहा किया था।
इंडियन एयरलाइन्स के पैसेंजर्स की जान के बदले रिहा किया गया था मसूद अज़हर
गौरतलब है कि 1999 में 5 हथियारबंद आतंकवादियों ने 178 यात्रियों के साथ इंडियन एयरलाइंस के हवाई जहाज का अपहरण कर लिया था। हरकत-उल-मुजाहिद्दीन के आतंकियों ने भारत सरकार के सामने 178 यात्रियों की जान के बदले में अपने तीन आतंकियों की रिहाई का सौदा किया था। उन तीन आतंकवादियों में से एक मसूद अजहर भी था। तब अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री थे। यात्रियों की जान बचाने के लिए वाजपेयी सरकार ने मसूद अजहर समेत तीन आतंकियों को छोड़ने का फैसला किया। उस वक्त मसूद अजहर आतंकी संगठन हरकत-उल-मुजाहिदीन का सदस्य था।
भारतीय संसद पर हमले की साजिश रची थी इस आतंकी सरगना ने
रिहाई के बाद मसूद अजहर कराची चला गया जहां उसने साल 2000 में फिर से जेहाद की दुनिया में कदम रखा। उसके तुरंत बाद ही 2001 में भारतीय संसद पर हमले के बाद अज़हर को पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था लेकिन लाहौर हाईकोर्ट के आदेश पर 2002 में उसे रिहा कर दिया गया।
नेतृत्व:
1. 2000 में मसूद अजहर जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर था और जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना भी मसूद अजहर ने ही की है।
2. 2003 में अब्दुल जब्बर इस संगठन का मुखिया बना।
लक्ष्य:
इस संगठन का उद्देश्य कश्मीर को पाकिस्तान के साथ जोड़ना और यह सुनिश्चित करना है कि पाकिस्तान में शरिया कानून लागू करना है। इस संगठन ने सार्वजनिक तौर पर अमेरिका के खिलाफ हमले का ऐलान किया था। इसके साथ ही यह संगठन हिंदुओं और गैर मुसलमानों को देश से बाहर भेजना चाहता है।
संसाधन
अगर बात की जाए कि इस संगठन के पास हथियार खरीदने के पैसे कहां से आते हैं तो आपको बता दे कि यह संगठन अल रशीद जैसे चेरिटेबल फाउंडेशन से फंड लेता है। यह संगठन चंदा इकट्ठा करने के लिए पर्सनल डोनेशन का तो सहारा लेते ही है साथ ही मैगजीन और पैम्फलेट लोगों तक पहुंचाकर भी चंदे की मांग की जाती है। इस संगठन को पाकिस्तान के बाकी आतंकवादी संगठन जैसे हरकत-उल-मुजाहिद्दीन, हरकत-उल-जिहाद से भी चंदा मिलता है। साल 2002 में इस संगठन के चंदा मांगने पर बैन सगा दिया गया, तो इस आतंकी संगठन ने रियल एस्टेट में भारी निवेश किया और अब उसी निवेश से यह कानूनी तरीके से अपने लिए फंडिंग की व्यवस्था करता है।