नई दिल्ली: इस दौर में गोपनीयता के लिए कोई जगह न होने की बात पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आरटीआई की प्रक्रिया में 3-टी-टाईमलीनेस (समयबद्धता), ट्रांसपेरेंसी (पारदर्शिता) और ट्रबल-फ्री अप्रोच (सरल पद्धति) के मंत्र का पालन किया जाना चाहिए ताकि लोगों को समयबद्ध तरीके से और पारदर्शिता के साथ बिना किसी परेशानी के सूचना मिल सके।
केंद्रीय सूचना आयोग की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून ने आम आदमी को सत्ता में बैठे लोगों से सवाल करने का अधिकार दिया है। उन्होंने अतिसक्रियता के साथ पारदर्शिता लाने पर जोर देते हुए कहा कि जितनी तेजी से हम पारदर्शिता की ओर बढ़ेंगें, जनता का लोकतंत्र में विश्वास मजबूत होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा, सूचना हासिल करने की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सरल होनी चाहिए। देर से मिलने वाली जानकारी समस्या को हल करने में मदद नहीं करती बल्कि इसे बढ़ाती ही है। समय पर सूचना मिल जाने से कोई गलत निर्णय रोका जा सकता है। हम इसपर जोर देंगे। महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह योजना आरटीआई के मूल्य की पूरक है क्योंकि जितनी ज्यादा चीजें ऑनलाइन होती हैं, उतनी ही ज्यादा पारदर्शिता आती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आरटीआई का इस्तेमाल शासन में सुधार लाने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, यदि किसी नागरिक द्वारा कोई सवाल पूछा जाता है तो जरूर सरकार में कोई न कोई मसला रहा होगा, तभी सवाल उठाए जाने की जरूरत पड़ी। आरटीआई का एक छोटा सा सवाल आपको नीति में बदलाव करने के लिए विवश कर सकता है। मोदी ने कहा कि सूचना का अधिकार कानून एक ऐसा माध्यम है, जिसके जरिए एक आम आदमी को न सिर्फ जानने का अधिकार मिला है, बल्कि उसे सत्ता में बैठे लोगों से सवाल पूछने का भी अधिकार मिला है।