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राष्ट्रपति ने की अपील, जल्द से जल्द पास हो महिला आरक्षण बिल

 Written By: Bhasha
 Published : Mar 05, 2016 06:44 pm IST,  Updated : Mar 05, 2016 06:48 pm IST

नई दिल्ली: संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को पारित कराने का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह

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नई दिल्ली: संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक तिहाई प्रतिनिधित्व प्रदान करने वाले विधेयक को पारित कराने का आह्वान करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि यह विधयेक अब तक संसद में पारित नहीं हो सका है और इसे पारित कराना सभी राजनीतिक दलों का दायित्व है क्योंकि इस विषय पर उनकी प्रतिबद्धता इसे अमलीजामा पहनाकर ही पूरी की जा सकती है।

राज्यों की महिला विधायकों एवं विधान पार्षदों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि दो तिहाई बहुमत से एक सदन में (लोकसभा) पारित होने के बाद भी महिलाओं को संसद और राज्य विधानसभाओं एवं परिषदों में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला विधेयक दूसरे सदन (राज्यसभा) में पारित नहीं हो सका है। उन्होंने कहा, इस बारे में राजनीतिक दलों का दायित्व है। उनकी प्रतिबद्धता कार्यरूप में अमल में आनी चाहिए।

प्रणब मुखर्जी ने कहा कि महिलाओं का सशक्तिकरण और संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के लिए यह जरूरी है। जब तक उन्हें आरक्षण नहीं दिया जायेगा, ऐसा नहीं हो सकेगा। राष्ट्रपति ने कहा कि राजनीतिक दल जो अपना प्रतिनिधि मनोनीत करते हैं, उन्हें इस दिशा में पहल करनी है। संसद की स्थायी समितियों में प्रतिनिधि मनोनीत करते समय इस पर ध्यान देना चाहिए।

राष्ट्रपति के संबोधन के समय मंच पर उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा सभागार में केंद्रीय मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों की महिला सांसद और राज्य विधानसभाओं की विधायक और पार्षद मौजूद थीं।

उन्होंने कहा कि यह देखना महत्वपूर्ण है कि जब अवसर दिया जाता है तब महिलाएं किस प्रकार से समाज को बेहतर बनाने का रास्ता तैयार कर देती हैं। आज पंचायतों एवं स्थानीय निकायों में 12.70 लाख निर्वाचित महिला प्रतिनिधि हैं और वे काफी अच्छा काम कर रहीं हैं। कई राज्यों में पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण को 33 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है और कई राज्य इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

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