इंदौर: 14 साल बाद पाकिस्तान से भारत लौटी गीता के माता-पिता का दावा करने वाले उत्तर प्रदेश के दंपति आज इंदौर पहुंचे। उन्होंने जिला प्रशासन से गीता से मुलाकात की मंजूरी मांगी। जिला प्रशासन का कहना है कि वह विदेश मंत्रालय के निर्देश हासिल करने के बाद ही इस मामले में कोई कदम उठायेगा।
उत्तप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से ताल्लुक रखने वाले रामराज गौतम और उनकी पत्नी अनारादेवी जिलाधिकारी पी. नरहरि से मिले और बाकायदा आवेदन पेश कर गीता से मुलाकात की इजाजत मांगी।
नरहरि ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया, ‘हम इस दम्पति के आवेदन को विदेश मंत्रालय भेजेंगे। विदेश मंत्रालय के निर्देशों के मुताबिक ही इस आवेदन पर कोई फैसला किया जायेगा।’
वहीं, गौतम ने कहा, ‘मुझे पूरा भरोसा है कि गीता ही हमारी बेटी सविता है, जो बिहार के छपरा से 11 साल पहले गुम हो गयी थी। गीता को अपनी बेटी साबित करने के लिये मैं और मेरी पत्नी अपना डीएनए टेस्ट कराने को भी तैयार हैं।’
अपनी गुम बेटी की तलाश में सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर इंदौर पहुंचे इस दम्पति के पास अपनी बेटी की बचपन में खींची गयी तस्वीर है। यह दम्पति उत्तप्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के रामा का पुरवा गांव का रहने वाला है। अनारा देवी ने भावुक लहजे में कहा, हम गीता से बस एक बार मिलना चाहते हैं। अगर वह हमें पहचानने से इंकार कर देगी, तो हम उल्टे पांव अपने गांव लौट जायेंगे।
बता दे कि गीता इन दिनों इंदौर के जिला प्रशासन की निगरानी में एक स्थानीय मूक बधिर संगठन के आवासीय परिसर में रह रही है। वह इस परिसर में तब तक रहेगी, जब तक सरकार उसके परिवार को खोज नहीं लेती।
गीता एक दशक से अधिक समय पहले गलती से सीमा लांघकर पाकिस्तान चली गयी थी। वह 26 अक्तूबर को पाकिस्तान से स्वदेश लौटी। हालांकि, स्वदेश वापसी के बाद गीता उस परिवार के सदस्यों को नहीं पहचान पायी जिन्हें उसने शुरू में तस्वीरों से पहचानने का दावा किया था।