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उत्तराखंड: राष्ट्रपति शासन हटा, बागी विधायकों की सदस्यता गई, पढ़ें कैसे लगा था राष्ट्रपति शासन

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 21, 2016 03:52 pm IST,  Updated : May 05, 2016 04:34 pm IST

उत्तराखंड में जारी संकट के बीच आज नैनीताल हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटा दिया है। कोर्ट के आदेश के तहत अब कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होनी है।

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नैनीताल: उत्तराखंड में जारी संकट के बीच आज नैनीताल हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटा दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार को बहाल करने के साथ ही 29 अप्रैल तक हरीश रावत को बहुमत साबित करने को कहा है। साथ ही हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने की भी बात कही है। कोर्ट के आदेश के तहत अब कांग्रेस के 9 बागी विधायकों की सदस्यता रद्द होनी है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हरीश रावत ने कहा, उत्तराखंड उच्च न्यायालय का फैसला उत्तराखंड के लोगों की जीत है।

बदल गया गणित:

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि बागी विधायकों को संविधान के साथ किए गए पाप की सजा भुगतन होगी। अब ऐसे में हरीश रावत के लिए बहुमत साबित करना आसान हो गया है। अब सदन में 62 विधानसभा सीटें ही रह गई हैं जिसमें से बहुमत साबित करने के लिए 31 सीटों की ही जरूरत होगी। कांग्रेस के पास फिलहाल 33 सीटें हैं।

 

FLASH: #Uttarakhand HC sets aside President's rule proclamation

— ANI (@ANI_news) April 21, 2016

 

#Uttarakhand HC sets aside President's rule proclamation: Celebrations at Harish Rawat's residence in Dehradun pic.twitter.com/AIpzmSmsJV

— ANI (@ANI_news) April 21, 2016

गौरतलब है कि राज्यपाल की सिफारिश के बाद 27 मार्च को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था। राज्य में राजनीतिक संकट की सुगबुगाहट 18 मार्च से ही शुरु हो गई थी। नैनीताल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद हरीश रावत समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई है।

उत्तराखंड में कब और कैसे लगा राष्ट्रपति शासन:

  • 18 मार्च को उत्तराखंड विधानसभा में धन विधेयक पर बहस के दौरान भाजपा ने वोटिंग की मांग की लेकिन स्पीकर ने इस मांग को अस्वीकार कर दिया।
  • धन विधेयक ध्वनिमत से पास हो गया। कांग्रेस के 9 विधायकों ने बगावत कर भाजपा का साथ दिया। बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर सदन में बहुमत का दावा किया। इस बहुमत में भाजपा के 27 और 9 बागी विधायकों समेत 35 की संख्याबल का दावा किया गया।
  • 18 मार्च को ही सभी बागी विधायकों ने भाजपा के साथ मिलकर राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया।
  • सभी ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात की और फिर राष्ट्रपति से मुलाकात कर हरीश रावत की सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई।
  • 19 मार्च को राज्य के राज्यपाल केके पाल ने ने हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का वक्त दिया।
  • स्पीकर ने दल बदल कानून का उल्लंघन करने के लिए 9 बागी विधायकों को उनकी सदस्यता रद्द करने का नोटिस भेजा। उन्हें 26 मार्च को ही इस पर शाम तक जवाब देना था।
  • 26 मार्च को बागी विधायकों ने दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान हरीश रावत का एक स्टिंग आपरेशन जारी किया। इस स्टिंग में हरीश रावत अपनी सरकार को बचाने के लिए विधायकों को करोड़ों रुपए देने का ऑफर देते नजर आए। यहीं से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की भूमिका तैयार हो गई थी।  
  • 27 मार्च को हरीश रावत के सदन में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही रविवार के दिन राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।
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