नई दिल्ली: फर्जी डिग्री मामले ने अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी अपनी चपेट में ले लिया है! जानकारी के मुताबिक साल 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए अपने हलफनामें में नरेंद्र मोदी ने गुजरात विश्वविद्यालय की जिस परास्नातक डिग्री का जिक्र किया था अब वही विवाद की जड़ बन गया है। दरअसल अब पीएमओ का कहना है कि उसके पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात विश्वविद्यालय वाली एमए की डिग्री के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। पीएमओ की इस जानकारी के बाद ट्विटर पर हंगामा खड़ा हो गया और #DegreeDikhaoPMSaab ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा। अहम मंत्रालयों में बैठे मंत्रीगणों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर अब सवाल और मुखर होने लगे हैं। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर से शुरु हुई फर्जी डिग्री मामले की आंच इस साल देश की शिक्षामंत्री स्मृति इरानी की चौखट तक पहुंच चुकी थी।

नरेंद्र मोदी के चुनावी हलफनामें में क्या था-
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में लोकसभा चुनाव के लिए आवेदन के दौरान जो हलफनामा भरा था उसमें उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स और दिल्ली विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ आर्ट्स की डिग्री का जिक्र किया था। जानकारी के मुताबिक मोदी ने अपने हलफनामें में जिस शैक्षणिक योग्यता का जिक्र किया उन्होंने वहीं शैक्षणिक योग्यताएं अपनी 2007 और 2012 में गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान भरे हलफनामें में भी दर्ज कराई थीं।
गुजरात विश्वविद्यालय से MA पर विवाद-
कुछ लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री की वेवबसाइट पर उनकी गुजरात विश्वविद्यालय वाली एमए की डिग्री का कोई उल्लेख नहीं है। यह बात सच है कि प्रधानमंत्री की वेबसाइट पर उनकी एमए डिग्री का कोई उल्लेख नहीं है। लेकिन इस संदर्भ में उनकी प्रोफाइल में शिक्षा का उल्लेख नहीं है। वास्तव में गुजरात विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट ने नरेंद्र मोदी को बतौर पूर्व छात्र बताते हुए यह बताया है कि उन्होंने विश्वविद्यालय से यह डिग्री हासिल की है।
पीएमओ की तरफ से आरटीआई का जवाब-
मीडिया के कुछ हलकों का कहना है कि पीएमओ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया। पीएमओ ने अपने जवाब में कहा कि इस तरह की जानकारी उनके रिकॉर्ड में नहीं है इसलिए उसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है।