नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने मंगलवार को मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के दौरान ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। आरबीआई की मौजूदा वित्तीय वर्ष की छठी मौद्रिक समीक्षा नीति में रेपो दर और रिवर्स रेपो दरों में बदलाव नहीं हुआ। आरबीआई को चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान जो इससे कम भी हो सकती है, मुश्किलों के बावजूद 2016-17 में वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहेगी। पिछले साल रिजर्व बैंक ने प्रमुख नीतिगत दर में 1.25 प्रतिशत की कटौती की और रेपो दर फिलहाल 6.75 प्रतिशत है। हालांकि दिसंबर में पाचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं किया।
वैसे, उद्योग मंडल फिक्की के नए अध्यक्ष हषर्वर्धन नेवतिया ने हाल ही में कम ब्याज दर की वकालत करते हुए कहा था कि कोष की लागत ऊंची है और ब्याज दर में कटौती से निवेश को गति देने में मदद मिलेगी। इससे पहले बोफा मेरिल लिंच ग्लोबल रिसर्च ने कहा था कि हमें उम्मीद है कि रिजर्व बैंक फरवरी की मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है।
पॉलिसी रिव्यु में राजन ने कहा कि महंगाई, स्ट्रक्चरल रिफॉर्म और आने वाले बजट के पर हमारी नजर बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में जब भी कटौती का फैसला लिया जाएगा उस वक्त महंगाई दर को देखकर होगा। आरबीआई के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2016-2017 में देश की जीडीपी ग्रोथ 7.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। इसके साथ ही रिजर्व बैंक ने 2015-16 में जीडीपी की ग्रोथ रेट 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया है।
सिंगापुर के प्रमुख बैंक डीबीएस ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर अपनी रिपोर्ट में कहा था कि रिजर्व बैंक दो फरवरी को पॉलिसी रेट को स्थिर रखेगा। 2015 ब्याज दरों में कुल 1.25 फीसदी की कटौती हुई। डीबीएस के मुताबिक यदि 2016-17 का बजट केंद्रीय बैंकों को सरकार की राजकोषीय पुनर्गठन की कोशिश के संबंध आश्वस्त करे तो हमें उम्मीद है कि मार्च या अप्रैल में 0.25 फीसदी की कटौती होगी। महंगाई जनवरी 2016 के लक्ष्य के दायरे में है लेकिन इसमें बढ़ोतरी का जोखिम है, क्योंकि खुदरा महंगाई दर 2015 की तीसरी तिमाही से बढ़ रही है।