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आतंकवाद की तुलना में सड़क हादसों में 4 गुना अधिक मौतें

 Written By: IANS
 Published : Sep 24, 2015 02:30 pm IST,  Updated : Sep 24, 2015 02:33 pm IST

नई दिल्ली: भारत में सड़क दुर्घटना से मौतों की संख्या आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों से चार गुना अधिक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रपट के मुताबिक, दो वर्षो में सड़क दुर्घटना

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आतंकवाद की तुलना में सड़क हादसों में 4 गुना अधिक मौतें

नई दिल्ली: भारत में सड़क दुर्घटना से मौतों की संख्या आतंकवाद के कारण होने वाली मौतों से चार गुना अधिक है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की रपट के मुताबिक, दो वर्षो में सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों में कमी आने के बाद 2014 में इनकी संख्या में फिर से बढ़ोतरी हुई है। इनमें से अधिकांश मौतें वाहन चालक की गलती के कारण हुईं।

एक अनुमान के मुताबिक, सड़कों पर होने वाली मौतों में से अधिकांश ऐसे कारणों से होती हैं जिन्हें रोका जा सकता है जैसे कि वाहन की तेज रफ्तार, शराब पीकर वाहन चलाना और वाहन पर आवश्यकता से ज्यादा सवारियां या माल होना।

पांच कारणों पर लगाम लगाकर सड़क हादसों से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है।

-भारतीय सड़कों पर होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण तेज गति है। 2014 में इसके कारण 41 फीसदी मौतें हुई थीं। इससे पूर्व के वर्षो में भी तेज गति के कारण होने वाली मौतों का आंकड़ा लगभग इतना ही था। इस कारक को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। वाहनों की गति में थोड़ी कमी लाकर काफी हद तक सड़क हादसों को रोका जा सकता है।

सड़क सुरक्षा के लिए समर्पित अमेरिका के एक संगठन ए.ए.ए. फाउंडेशन द्वारा प्रायोजित एक अध्ययन के अनुसार, 37 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही कार से टकराने पर एक राहगीर की मौत का अनुमानित खतरा 10 फीसदी है, लेकिन यही खतरा वाहन की तेज गति के साथ काफी बढ़ जाता है और तेज रफ्तार पर यह 90 फीसदी हो जाता है। खासतौर पर राजमार्गो पर गति शहर की तुलना में काफी अधिक होती है। राजमार्गो पर गति सीमा पर सख्ती लागू करके हजारों जानें बचाई जा सकती हैं।

- भारतीय राजमार्गो पर सामान्य से ज्यादा भरे और तेज रफ्तार ट्रक बेहद आम हैं। जरूरत से ज्यादा भरे ये ट्रक प्रतिदिन 100 जिंदगियां लील लेते हैं। 2014 में इन दो कारणों से 36,543 मौतें हुईं। दोनों कारण ऐसे हैं जिन पर अकुंश लगाया जा सकता है।

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