नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने मैसूर प्रयोगशाला को यह स्पष्ट करने के लिए कहा कि क्या मैगी में सीसे और ग्लूटामिक एसिड की जांच रिपोर्ट कानून के तहत तय मानकों के मुताबिक है। सुप्रीम कोर्ट ने मैसूर लैब को यह सब परखने के लिए सिर्फ 8 हफ्ते का समय दिया है। गौरतलब है कि भारत के घर-घर में लोकप्रिय मैगी को सीसे और ग्लूटामिक एसिड की बढ़ी हुई मात्रा के चलते प्रतिबंधित कर दिया गया था और शिकायत के बाद नेस्ले ने अपने काफी सारे पैकेट्स भारतीय बाजारों से वापस भी ले लिए थे।
नेस्ले के उत्पाद मैगी की जांच कर रही मैसूल लैब को सुप्रीम कोर्ट ने 8 और हफ्तों का वक्त दिया है। इन दिनों में ही लैब को परखकर बताना होगा कि सैंपल में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट (एमएसजी) तय मानक में हैं या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा है कि लैब अगर चाहे तो मैगी के कुछ और सैंपल भी मंगा सकती है। मैगी विवाद पर अगली सुनवाई चार अप्रैल को होनी है। कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद मैगी ने भले ही भारतीय बाजार में दस्तक दे दी हो लेकिन विवादों ने अब भी उसका पीछा नहीं छोड़ा है। सुप्रीम कोर्ट एफएसएसआई की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें बॉम्बे हाइकोर्ट के मैगी से बैन हटाने के फैसले को चुनौती दी गई है। इस याचिका के पीछे एफएसएसआई की दलील थी कि जांच के लिए सैंपल खुद नेस्ले ने दिए थे जबकि स्वतंत्र एजेंसी को खुद सैंपल लेने चाहिए थे।