नई दिल्ली: शिरडी साईं बाबा एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु, योगी और फ़कीर थे। साईं बाबा को कोई चमत्कारी पुरुष तो कोई दैवीय अवतार मानता है, लेकिन कोई भी उन पर यह सवाल नहीं उठाता कि वह हिन्दू थे या मुस्लिम। साईं बाबा ने जाति-पांति तथा धर्म की सीमाओं से ऊपर उठकर एक विशुद्ध संत की तस्वीर प्रस्तुत की थी। वे सभी जीवात्माओं की पुकार सुनने व उनके कल्याण के लिए पृथ्वी पर अवतीर्ण हुए थे।
साईं बाबा समूचे भारत के हिन्दू-मुस्लिम श्रद्धालुओं तथा अमेरिका और कैरेबियन जैसे दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाले कुछ समुदायों के भी प्रिय थे।
जीवन परिचय
साईं बाबा का जन्म 28 सितंबर, 1836 ई. में हुआ था। इनके जन्म स्थान, जन्म दिवस और असली नाम के बारे में भी सही-सही जानकारी नहीं है। लेकिन एक अनुमान के अनुसार साईं बाबा का जीवन काल 1838 से 1918 के बीच माना जाता है। फिर भी उनके आरंभिक वर्षों के बारे में रहस्य बना हुआ है।
ऐसी मान्यता है कि 1858 के आस-पास साईं बाबा पश्चिम भारतीय राज्य महाराष्ट्र के एक गाँव शिरडी पहुँचे और फिर आजीवन वहीं रहे। साईं बाबा मुस्लिम टोपी पहनते थे और जीवन में अधिंकाश समय तक वह शिरडी की एक निर्जन मस्जिद में ही रहे, जहाँ कुछ सूफ़ी परंपराओं के पुराने रिवाज़ों के अनुसार वह धूनी रमाते थे। मस्जिद का नाम उन्होंने 'द्वारकामाई' रखा था, जो निश्चित्त रूप से एक हिन्दू नाम था। कहा जाता है कि उन्हें पुराणों, भगवदगीता और हिन्दू दर्शन की विभिन्न शाखाओं का अच्छा ज्ञान था।
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