इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर में एक अजीब वाक्या सामने आया जब एक बुजुर्ग भालू को 11 पंडितों ने गीता के श्लोक सुनाकर अंतिम विदाई दी। जानकारी के मुताबिक लकवे के कारण यह भालू बुरी तरह परेशान था इसलिए उसे दया मृत्यु देने का फैसला किया गया। डॉक्टरों की एक पूरी टीम ने 11:22 मिनट पर इस भालू को दया मृत्यु देने की प्रक्रिया शुरु की। इस प्रक्रिया में वर्ल्ड सोसायटी फॉर दी प्रोटेक्शन ऑफ एनिमल्स के दिशानिर्देशों का पालन किया गया। गौरतलब है कि करीब तीन महीने पहले ही जू प्रशासन से सोनू को दया मृत्यु देने की अनुमति मांगी गई थी जिसे मंजूरी दे दी गई।
सोनू को इस तरह मिली विदाई-
इस भालू को पिंजरे में ही मेकसेल्फ नामक केमिकल के तीन इंजेक्शन दिए गए। इसके बाद पिंजड़े को ढक दिया गया, जब सोनू बेहोश हो गया तब उसे पिंजड़े से बाहर लाया गया। फिर सोनू को मैग्निशियम सल्फेट की 300 एमएल की हैवी डोज दी गई। कुछ ही देर बाद सोनू की धड़कने रुक गईं। हालांकि इससे पहले चिड़ियाघर में करीब 10 बजे 11 पंडितों ने सोनू को गीता के श्लोक भी सुनाए। पोस्टमार्टम के बाद सोनू को चिड़ियाघर में ही दफनाए जाने का फैसला किया है।
मुश्किल में था सोनू-
आमतौर पर एक भालू 25 से 30 साल तक ही जिंदा रहता है। जानकारी के मुताबिक सोनू के पैदा होते ही उसे जन्म देने वाले भालू ने उसका एक हांथ उखाड़ दिया था। वह करीब ढ़ाई साल की उम्र से ही लकवे की बीमारी से जूझ रहा था। उसके 80 फीसदी शरीर में लकवा मार चुका था और वो अंतिम दिनों में ठीक से करवट भी नहीं बदल पा रहा था। जू प्रशासन के लोग ही करवट बदलने में उसकी मदद किया करते थे।