लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर में दो साल पहले हुए साम्प्रदायिक दंगों की न्यायिक जांच रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपे जाने के बाद सियासी पार्टियों के बीच एक-दूसरे पर दोषारोपण का दौर फिर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने इन फसाद के लिए सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी (सपा) पर निशाना साधा है।
मुजफ्फरनगर दंगों के आरोपी भाजपा विधायक संगीत सोम ने फसादात की जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा गठित अवकाश प्राप्त न्यायाधीश विष्णु सहाय आयोग के कल राज्यपाल राम नाईक को अपनी रिपोर्ट सौंपे जाने के बारे में संवाददाताओं से कहा मैं बस यह जानना चाहता हूं कि जांच आयोग ने हमसे कोई बात क्यों नहीं की। क्या आयोग ने हमें जांच का हिस्सा बनाया। हमारे पास जो पुख्ता प्रमाण हैं कि सपा नेताओं और अधिकारियों ने दंगे कराये थे, वे प्रमाण भी हमसे नहीं लिए गए। मुझे नहीं लगता कि रिपोर्ट का कोई औचित्य है।
भाजपा के प्रान्तीय अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगों में भाजपा की कोई भूमिका नहीं है और इसके लिए सपा पूरी तरह जिम्मेदार है। उन्होंने कहा मैंने रिपोर्ट नहीं पढ़ी है लेकिन हमें पता है कि घटनाक्रम को प्रारम्भ करने में सपा का हाथ साबित होगा, हमारे पास इसके पर्याप्त प्रमाण हैं। इस बीच, बसपा मुखिया मायावती ने विष्णु सहाय आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने तथा दंगे करवाने में शामिल रहे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने एक बयान में कहा कि वैसे तो समाजवादी पार्टी की सभी हुकूमतों के दौरान उत्तर प्रदेश में भीषण साम्प्रदायिक दंगे होते रहे हैं लेकिन मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में सरकार की घोर लापरवाही सामने आई है। मायावती ने कहा कि दंगों की वजह से बड़ी संख्या में मुसलमान बेघर हो गए और सपा सरकार ने शासकीय जमीन पर रह रहे विस्थापित लोगों के तम्बुओं पर बुल्डोजर चलवा दिया। इधर, सपा प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने दंगों के लिए भाजपा को दोषी ठहराते हुए कहा कि साम्प्रदायिक शक्तियां प्रदेश का माहौल बिगाड़ना चाहती हैं। साढ़े तीन साल से भाजपा साम्प्रदायिकता फैलाना चाहती है। मुजफ्फरनगर में जो हुआ वह इसी का नतीजा था।