नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने आज केन्द्र सरकार के इस पुरजोर अनुरोध का संज्ञान लिया कि उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और रसोई गैस योजना के इतर कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए आधार कार्ड के स्वैच्छिक इस्तेमाल की अनुमति दी जाए। साथ ही न्यायालय ने सवाल किया कि क्या यह आश्वासन दिया जा सकता है कि आधार कार्ड नहीं होने या जानबूझकर इस्तेमाल नहीं करने की वजह से किसी के लिए भी असुविधाजनक स्थिति नहीं होगी।
प्रधान न्यायाधीश एच एल दत्तू की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष जब अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ निर्धनतम तबके तक पहुंचाने के लिये स्वैच्छिक रूप से आधार कार्ड के इस्तेमाल की अनुमति देने का पुरजोर अनुरोध किया तो पीठ ने सवाल किया, क्या आप (केन्द्र) इन योजनाओं का लाभ देने के लिए पूर्ववर्ती शर्त रखते हैं? क्या आप कहते हैं कि आधार कार्ड के अभाव की वजह से किसी व्यक्ति को असुविधा नहीं होगी?
अटार्नी जनरल ने कहा, इस सवाल का (क्या आधार स्वैच्छिक होगा) जवाब है हां। यदि न्यायालय चाहे तो इस संबंध में सबसे बड़े अधिकारी का हलफनामा कल सुबह साढ़े दस बजे उपलब्ध रहेगा। करीब दो घंटे की सुनवाई के दौरान रोहतगी ने बार बार दोहराया कि किसी को भी आधार कार्ड नहीं होने या इसका इस्तेमाल नहीं करने के आधार पर वंचित नहीं किया जाएगा। संविधान पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति एमवाई इकबाल, न्यायमूर्ति सी नागप्पन, न्यामयूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमिताव राय शामिल हैं। यह संविधान पीठ 11 अगस्त के आदेश में संशोधन के लिए केन्द्र, रिजर्व बैंक, सेबी, इरडा, ट्राई, पेन्शन कोष नियामक प्राधिकरण और गुजरात तथा झारखण्ड जैसे राज्यों की याचिकाओं पर कल भी सुनवाई कर सकती है।
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