नई दिल्ली: समलैंगिकता की जिंदगी जीने वालों और इसका समर्थन करने वालों के लिए आज का दिन बेहद अहम है। समलैंगिकता के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट दोबारा सुनवाई करने को तैयार हो गया है। आज होने वाली सुनवाई में तय होगा कि भारत में समलैंगिकता अपराध रहेगा या नहीं। मामले में समलैंगिक अधिकारों की वकालत कर रहे नाज फाउंडेशन सहित दूसरे संगठनों और श्याम बेनेगल जैसी शख्सियतों ने 23 फरवरी 2014 को क्यूरेटिव याचिका लगाई थी।
चीफ जस्टिस टी.एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ सुप्रीम कोर्ट के 11 दिसंबर, 2013 के फैसले के खिलाफ समलैंगिक अधिकारों के लिए प्रयत्नशील कार्यकर्त्ताओं और गैर सरकारी संगठन नाज फाउंडेशन की सुधारात्मक याचिका पर सुनवाई के लिए सहमत हो गई। कोर्ट ने इस फैसले में अप्राकृतिक यौन अपराधों से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 377 की वैधता बरकरार रखी थी। न्यायालय ने इसके बाद जनवरी, 2014 में इस निर्णय पर पुनर्विचार के लिए दायर याचिकाए भी खारिज कर दी थी। सुधारात्मक याचिका कोर्ट के माध्यम से अन्याय के निदान हेतु उपलब्ध अंतिम न्यायिक उपाय है।
आईपीसी की धारा 377 के तहत समलैंगिकता को अपराध बताने वाले फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ क्यूरेटिव याचिका पर अब सुनवाई के लिए तैयार है। क्यूरेटिव बेंच आज से सुनवाई शुरू करेगी। ये सुनवाई खुली अदालत में होगी। क्यूरोटिव याचिका की सुनवाई आखिरी फैसले के आधार पर होती है। इस याचिका की सुनवाई के बाद आए फैसले को आखिरी माना जाता है। हालांकि क्यूरेटिव याचिका पर सुनवाई चेंबर में होती है, लेकिन इस मामले की सुनवाई खुली अदालत में होगी। नाज फाउंडेशन बनाम सुरेश कुमार कौशल का यह केस 2 फरवरी के लिए एडवांस लिस्ट में शामिल है। चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली बेंच इसकी सुनवाई करेगी।