नई दिल्ली: आप ने 'शोले' फिल्म में असरानी का यह डायलॉग तो सुना होगा कि हम अंग्रेज़ो के ज़माने के जेलर है,लेकिन हम जिस आई पी एस का ज़िक्र कर रहे है वो जेलर तो नहीं, लेकिन उसकी हनक अंग्रेज़ो के ज़माने की है वो आई पी एस उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर ज़िले के पुलिस कप्तान केवल खुराना है। जिन्होंने अंग्रेज़ो के ज़माने की तर्ज़ पर पुलिस कर्मियों को फिट रखने के लिए वजनतोलु क्लास शुरू की तो पूरे पुलिस महकमे को पसीने आ गये है। सात सिपाही अपना एक दिन का वेतन कटा बैठे,चार सिपाही लाईन हाज़िर हुए,दो पुलिस कर्मियों को सशस्त्र पुलिस में भेजने के साथ ही एक सिपाही को लाईन हाज़िर होना पड़ा। यह सब कप्तान की वजन तोलु कला स में फैल हो गए थे।पुलिस लाईन में कप्तान ने वज़न तोलने की मशीन मंगवा कर जब सब सिपाहियों का वज़न तुलवाना शुरू किया तो पूरे पुलिस महकमे में भूचाल आ गया। अधिकाँश सिपाहियों का वज़न काफी बड़ा हुआ था। कप्तान ने कुछ दिन पहले ही पुलिस कर्मियों को अपना वज़न कम करने की चेतावनी दी थी, लेकिन कम पुलिसकर्मियों ने इस चेतावनी को गंभीरता से लिया। जिसका खामियाज़ा उन्हें सजा के रूप में भुगतना पड़ा। कप्तान की कड़क क्लास में एक पुलिस कर्मी तो रो पड़ा। जबकि एक पुलिस कर्मी पर सब इंस्पेक्टर को पीठ पर लाद कर मैदान के चक्कर लगवाये। तोंदू पुलिस कर्मियों को भी मैदान में दौड़ लगानी पड़ी।कप्तान की इस क्लास में खरा उतरने वाले कुछ सिपाहियों को इनाम से नवाज़ा भी गया। कुल 43 पुलिस कर्मियों के वज़न का परीक्षण किया गया। क्लास में कुछ पुलिस कर्मियों ने वर्दी और जूते तक ठीक से नहीं पहने थे। ऐसे सिपाहियों के खिलाफ भी कारवाही की गया है। कप्तान की इस कड़क कार्यशैली से जहां जनता के बीच कप्तान की छवि बेहतर बनी है, वही कप्तान को अपनी इस कार्यशैली की वजह से डी जी पी बी एस सिद्धू ने पूरे मामले की जाँच डी आई जी से करा दी है। पुलिस महकमा कप्तान से बुरी तरह डरा हुआ है। वही ऊधम सिंह नगर जैसे बड़े ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात केवल खुराना का कहना है कि पुलिस कर्मियों चुस्तदुरुस्त रखने के लिए यह ज़रूरी है। जिनके कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी हो उन्हें चुस्त रहना चाहिए। अगली स्लाइड में देखें तस्वीरेंअगली स्लाइड में देखें तस्वीरेंअगली स्लाइड में देखें तस्वीरेंअगली स्लाइड में देखें तस्वीरें