नई दिल्ली: धर्मनीति और कूटनीति के बारे में दुनिया भर को ज्ञान देने वाले आचार्य चाणक्य ने व्यक्ति के स्वभाव और उसके गुणों के संबंध में भी उन अमूल्य बातों को दुनिया के सामने किया है जो आज भी यथार्थ के करीब जान पड़ती हैं। कौटिल्य के नाम से भी जाने जाने वाले आचार्य व्यक्ति के कुछ गुणों को ही उसका अच्छा मित्र समझते थे। उनका मानना था कि अगर किसी व्यक्ति के जीवन में कुछ चुनिंदा बेहतर गुणों का वास है तो हमेशा तरक्की की राह पर अग्रसर होता है। अगर हम इन गुणों को आत्मसात कर लें तो शायद हमें दुनिया की तमाम खुशियां भी फीकी नजर आ सकती हैं। जानिए आचार्य ने किन किन बातों का जिक्र किया है।
सत्यं माता पिता ज्ञानं धर्मो भ्राता दया सखा।
शांति: पत्नी क्षमा पुत्र: षडेते मम बान्धवा:।।
इस श्लोक को तहत आचार्य ने वह गूढ़ बात कहने की कोशिश की है जिसे समझने पर हर किसी का भला हो सकता है। वैसे तो हर व्यक्ति में तमाम गुण और दोष होते हैं लेकिन फिर भी उसके भीतर भी कहीं न कहीं कुछ बेहतर जरूर होते हैं। इनमें से ही कुछ गुण आपको महान और समृद्धशील बनाते हैं। परखिए क्या आपके पास भी हैं ऐसे ही कुछ अमूल्यवान गुण। आचार्य 6 गुणों को व्यक्तियों का परम हितैषी यानी उसका सच्चा मित्र मानते थे।
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सत्य माता के समान-
आचार्य का मानना था कि अगर आप सत्य बोलते हो तो आप हरदम तरक्की की राह पर बढ़ते रहोगे। जैसे एक मां हरदम अपने बेटे का भला चाहती है उसी तरह सत्य बोलकर आप भलाई से रास्ते पर खुद-ब-खुद बढ़ते चले जाते हो। अगर आप हरदम सत्य बोलते हो तो हर कोई आपकी मदद को तैयार रहता है। यानी जिस तरह एक मां अपने बेटे को खुश देखना पसंद करती है उसी तरह सत्य बोलने वाला हरदम चेहरे पर मुस्कान लिए होता है।
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