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वयोवृद्ध भाकपा नेता बर्धन की हालत अभी भी नाजुक

 Written By: IANS
 Published : Dec 08, 2015 03:49 pm IST,  Updated : Dec 08, 2015 03:52 pm IST

नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वयोवृद्ध नेता ए.बी. बर्धन की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। उन्हें पक्षाघात के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सा अधीक्षक डा. एस.एम. रहेजा ने

Veteran CPI leader AB Bardhan condition still critical- India TV Hindi
Veteran CPI leader AB Bardhan condition still critical

नई दिल्ली: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के वयोवृद्ध नेता ए.बी. बर्धन की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है। उन्हें पक्षाघात के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सा अधीक्षक डा. एस.एम. रहेजा ने मंगलवार को कहा कि बर्धन (93) सोमवार को यहां भाकपा मुख्यालय में स्थित अपने आवास अजॉय भवन में अचेत अवस्था में मिले थे। उन्हें जी.बी. पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

भाकपा के पूर्व महासचिव बर्धन को अस्पताल की आपातकालीन विंग में भर्ती कराया गया है और वरिष्ठ चिकित्सा उनकी देखरेख में लगे हुए हैं, जिन्होंने उनकी हालत 'नाजुक' बताई है। रहेजा ने आईएएनएस को बताया, "बर्धनजी को सोमवार को पक्षाघात हुआ था। उन्हें गहन निगरानी में रखा गया है, लेकिन उनकी हालत अभी भी चिंताजनक है।"

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने आज कहा, उनकी हालत लगातार नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर अपनी ओर से पूरी कोशिश कर रहे हैं। वाम दल के नेताओं के अलावा राकांपा प्रमुख शरद पवार भी कल उन्हें देखने के लिए जीबी पंत अस्पताल गए थे। 92 वर्षीय बर्धन का इलाज इसी अस्पताल में चल रहा है।

भाकपा के वरिष्ठ नेता अतुल अंजन ने कहा, उनकी बेटी और पोता भी शहर में ही हैं। यहां भाकपा मुख्यालय में रहने वाले बर्धन कल बेहोश हो गए थे, जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया था। बर्धन की पत्नी नागपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थीं और उनका निधन वर्ष 1986 में हो गया था।

बर्धन ट्रेड यूनियन आंदोलन और महाराष्ट्र की वाम राजनीति में एक अग्रणी हस्ती रहे हैं। वर्ष 1957 में उन्होंने महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीता था। बाद में वह भारत की सबसे पुरानी ट्रेड यूनियन- ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस के महासचिव और फिर अध्यक्ष बने।

1990 के दशक में वह दिल्ली की राजनीति में आए और भाकपा के उप महासचिव बने। वर्ष 1996 में उन्होंने इंद्रजीत गुप्ता के बाद महासाचिव पद संभाला था।

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