नयी दिल्ली: पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के सलाहकार मंडल के सदस्य सुधीन्द्र कुलकर्णी इस्लामाबाद में 15 से 17 अप्रैल तक चले इस्लामाबाद लिटरैचर फ़ेस्टिवल में गए थे और वहां का माहौल, मेहमानवाज़ी और भारत के प्रति वहां के लोगों के प्रेम को देखर इतना अभिभूत हो गए कि फ़ेस्टिवल की सह-संस्थापक अमीना सईद से कहा, ‘’इस फ़ेस्टिवल में आने के बाद मैं ये कहे बिना नही रह सकता: ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद!’
पाकिस्तान न्यूज़ वेबसाइट डॉन ने सुधीन्द्र कुलकर्णी का एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें लेखक ने फ़ेस्टिवल के दौरान हुए अपने अनुभवों को शेयर किया है। उन्होंने लिखा है कि इन दिनों किसी भारतीय या पाकिस्तानी का एक दूसरे के देश के बारें में कुछ अच्छा कहना आसान नहीं है। ''मैं जब भी सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के बारे में कुछ अच्छा लिखता हूं तो अति-राष्ट्रवादी भारतीय मेरे पीछे लग जाते हैं और कहते हैं कि जाओ, जाकर पाकिस्तान में बस जाओ, हमें आपकी यहां ज़रुरत नहीं है।”
भारत-पाकिस्तान संबंधों में बलूचिस्तान, कश्मीर और सीमा पार आतंकवाद पर उन्होंने कहा, “भारत को बलूचिस्तान में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष किसी भी रुप में कोई भूमिका नहीं निभानी चाहिये। भारत को पाकिस्तान की एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिये और पाकिस्तान को भी भारत की एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिये।”
भारत-पाकिस्तान के संबंध और कश्मीर-विवाद पर सुधीन्द्र कुलकर्णी ने कहा कि “कश्मीर यक़ीनन भारत और पाकिस्तान के बीच एक बड़ा मसला है। हमारे दोनों देशों ने 1972 शिमला समझौता स्वीकार किया है जिसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम फ़ैसला अभी होना है। अनुभव बताता है कि युद्ध, भले ही पारंपरिक हो या आतंकवाद के ज़रिये हो, से कश्मीर समस्या का हल नहीं निकलेगा।” बक़ौल शायर साहिर लुधियानवी " जंग तो ख़ुद ही एक मसला है, जंग क्या मसलों का हल देगी"।
उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को जल्द से जल्द कश्मीर मसले का ऐसा हल निकालना चाहिये जो सभी को मान्य हो और कश्मीरियों को भी स्वीकार्य हो।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद और धार्मिक उग्रवाद पर कई पाकिस्तानी प्रतिनिधियों का मानना था कि ये “ख़ुद की पैदा” की हुई मुसीबत है जिससे देश के वजूद को ख़तरा है। उनका कहना था कि अफ़सोस कि ज़्यादातर भारतीयों को नहीं मालूम कि पिछले 15 सालों में पाकिस्तान ने आतंकी हमलों में 50 हज़ार से ज़्यादा जानें गंवाईं हैं जो भारत में आतंकवादी हमलों में मरने वालों की संख्या से कहीं ज़्यादा है। भारतीय मीडिया आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का कोई ज़िक्र नहीं करता।
कुलकर्णी ने कहा, ''मुझे बहुत हैरानी हुई जब मेरे ये कहने पर लोगों ने तालियां बजानी शुरु कर दी कि जिन्ना चाहते थे कि भारत-पाकिस्तान के संबंध अमेरिका-कनाडा के संबंधों की तरह हों और ये कि वह वापस बॉम्बे जाकर मालाबार में अपने घर में रहना चाहते थे।''
मैंने पूछा: अगर हमारे देश के राष्ट्रपिता नहीं चाहते थे कि दोनों देशों के बीच दीवार हो तो हमने क्यों दीवार बना रखी है।?
भारत और पाकिस्तान दोनों मेरे देश हैं। मैं वीज़ा लेकर पाकिस्तान नहीं जाऊंगा।" हमारी सरकारें बिछड़े परिवारों को मिलने के लिए वीज़ा क्यों नहीं देती?
बजाए इसके कि हम एक दूसरे से प्रेम से पेश आएं, हम क्यों एक दूसरे से बुरा बर्ताव करते हैं?