
"तो बतौर मुस्लिम और भारतीय होने के नाते और ऐसा व्यक्ति होने के नाते जो भौगोलिक सीमाओं से परे है तो मैं कहूंगा कि भारत और पाकिस्तान का लड़ना बेवकूफाना है। हम एक ही तरह की संस्कृति साझा करते हैं, एक ही तरह का खाना खाते हैं और एक ही तरह की भाषा बोलते हैं..मेरा विश्वास कीजिए कि बहुत सारे भारतीय अपने आप को पाकिस्तान से आया हुआ नहीं बता पाते। दिलचस्प बात यह है कि अगर आप पाकिस्तान और भारत के बाहर होते हैं और वहां अगर आपको कोई आपके देश का नहीं मिलता है तो आप अपना नजदीकी व्यक्ति ढूंढने की कोशिश करते हैं। चलिए सवाल पर लौटते हैं और क्रमवार जवाब देते हैं। हमें यह महसूस करने की जरूरत है कि हम हर हिंदू को एक जैसा नहीं समझ सकते और मुस्लिमों के साथ भी कुछ ऐसा है। मेरा मानना है कि हर जगह कुछ खुराफाती लोग हैं। मैं नहीं मानता कि पाकिस्तान मेरा दुश्मन है, वैसे तो मेरे दुश्मन गरीबी और घृणा होने चाहिए। मैं मानता हूं कि पाकिस्तानी सरकार का कुछ हिस्सा भारत में अस्थिरता लाने का प्रयास करता है, लेकिन हमें यह समझने की जरूरत है कि पाकिस्तान की सरकार पाकिस्तान का सिनोनेम नहीं है।”
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