बैतूल: शौचालय के लिए ससुराल छोड़ने का साहसपूर्ण निर्णय लेने वाली दलित महिला सीमा पटेल (20) को जिला प्रशासन ने आज जिले का स्वच्छता दूत बनाने की घोषणा की है। इसके अलावा उसके ससुराल में शौचालय निर्माण के साथ उसे पुरस्कृत भी किया जाएगा। जिला कलेक्टर ग्यानेश्वर बी पाटिल ने कहा, सीमा ने स्वच्छता की दिशा में अभूतपूर्व साहस दिखाया है। उसके इस साहसिक निर्णय के लिए उसे स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले का स्वच्छता दूत बनाया गया है। उसके पति के घर पर शौचालय का निर्माण भी आज से शुरू किया जा रहा है। उन्होंने कहा, स्वच्छता की दिशा में ऐसा साहसिक निर्णय लेकर अलख जगाने वाली सीमा को जिला प्रशासन द्वारा पुरस्कृत भी किया जाएगा। इससे स्वच्छता अभियान को बल मिलेगा।
बैतूल जिले के शाहपुर ब्लाक मुख्यालय पर स्थित पतौवापुरा के चौकीपुरा निवासी मोहन पटेल (23) का विवाह पिपरिया निवासी सीमा (20) के साथ वर्ष 2012 में हुआ था। विवाह के बाद लगभग 29 महीने तक सीमा द्वारा लगातार ससुराल में शौचालय बनाने की मांग कर रही थी, लेकिन ससुराल पक्ष द्वारा इसे पूरा नहीं किया गया। इससे नाराज सीमा अंतत: जनवरी 2014 में अपने मायके चली गई और गत लगभग 20 महीने से मायके में ही रह रही है। पति द्वारा काफी मिन्नते करने के बावजूद भी जब सीमा घर नहीं आई तो उसने हाल ही में परिवार परामर्श केंद्र में पत्नी को वापस अपने घर बुलाने की गुहार लगाई।
शाहपुर परिवार परामर्श केंद्र की सदस्य रजनी गायकवाड़ ने मामले का अवलोकन करने और सीमा से चर्चा करने के बाद उसकी मांग को जायज ठहराते हुए गत गुरूवार को मोहन को एक माह के भीतर घर में शौचालय निर्माण करने के निर्देश दिए। गौरतलब है कि बैतूल जिले की आदिवासी महिला अनिता नर्रे ने वर्ष 2011 में शौचालय के अभाव में शादी के तुरंत बाद ही सुसराल छोड़ दिया था।