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''हम किसी के विरोध में नहीं, सबके साथ हैं'', BRICS के मंच से पीएम मोदी ने पूरी दुनिया को दिया संदेश

 Written By: Mangal Yadav
 Published : Sep 12, 2026 03:30 pm IST,  Updated : Sep 12, 2026 04:09 pm IST

ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी ने कहा कि हम सबका संदेश साफ होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा विजन सभी को साथ लेकर चलना है। संयुक्त बयान पर सहमति बन गई है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी Image Source : PTI

नई दिल्लीः BRICS समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि हमारा विजन सबको साथ लेकर चलना है। संयुक्त बयान पर सहमति बन गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने सदस्य देशों से कहा कि दोस्तों, भारत की मेज़बानी में हो रहे इस ब्रिक्स समिट का संदेश साफ़ होना चाहिए। अगर हमारा भविष्य साझा है, तो उस भविष्य को आकार देने का अधिकार भी साझा होना चाहिए। आवाज़ से लेकर असर तक, विशेषाधिकार से लेकर साझेदारी तक, यही इस समय ब्रिक्स का मुख्य संकल्प होना चाहिए।

हम किसी देश के खिलाफ नहीं

पीएम मोदी ने शनिवार को दो दिवसीय वार्षिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए कहा कि विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए 'ग्लोबल साउथ' को नियमों का पालन करने वाले के बजाय ''नियम तय करने वाला'' बनना होगा। पीएम ने कहा कि ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है और यह गुट किसी के खिलाफ नहीं है। उनके इस बयान को अमेरिका और अन्य पश्चिमी शक्तियों के लिए एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों में पहली पंक्ति में खड़ा है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में वह सबसे पीछे की पंक्ति में है। हमें इस विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा। एक ऐसा मंच जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य की हिस्सेदारी हो और हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।

अगले 20 सालों के लिए बड़े एजेंडे पर करें काम

पीएम मोदी ने कहा कि हमें अगले 20 सालों के लिए एक नए और बड़े लक्ष्य वाले एजेंडे पर काम करने की ज़रूरत है। हमें इस प्रक्रिया की शुरुआत अपने अंदरूनी कामकाज के तरीकों से करनी चाहिए। भले ही BRICS की अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन इससे हमारे संस्थागत कामकाज की रफ़्तार पर असर नहीं पड़ना चाहिए। मेरा प्रस्ताव है कि BRICS में निरंतरता और काम को लागू करने के लिए एक सिस्टम बनाया जाए। इससे 'ट्रोइका' (Troika) व्यवस्था के ज़रिए सभी पहलों और नतीजों पर आगे की कार्रवाई हो सकेगी। हम हर फ़ैसले से जुड़े नोडल पॉइंट, समय-सीमा और उसे लागू करने की स्थिति का रिकॉर्ड रखने के लिए एक सुरक्षित डिजिटल रिपॉज़िटरी भी बना सकते हैं। 

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